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कुंड एवं मण्डप विधि

*कुण्ड और मण्डप बिधि* ------------- यज्ञ का मण्डप एवं कुण्ड बहुत ही सुन्दर तथा सुव्यवस्थित बने हुए  तथा कलापूर्ण सुन्दरता के साथ सजे हुए होने चाहिए । कलापूर्ण वस्तुएँ, सुरुचिकर, आकर्षक एवं शोभनीय प्रतीत होती हैं, उनमें चित्त लगता है । कार्यकर्त्ताओं तथा दर्शकों का मन लगता है,  चित्त प्रसन्न होता है तथा उत्साह बढ़ता है । इसलिए ज्यों-ज्यों,  उल्टे-तिरछे कुण्ड-मण्डप बना लेने का निषेध किया गया है और इस बात पर जोर दिया गया है,  कि कला-व्यवस्था, नाप-तौल, सौन्दर्य, शोभा आदि का ध्यान रखकर ही इनका निर्माण किया जाय । यज्ञ का मण्डप किस प्रकार बनाया जाय तथा कुण्ड किस प्रकार तैयार किये जायँ,  इस सम्बन्ध में अनेक स्वतन्त्र प्राचीन पुस्तकें उपलब्ध हैं । (१) विट्ठल दीक्षित कृत-कुण्डार्क (२) शङ्कर भट्ठ कृत-कुण्डार्क (३) नारायण भट्ठ कृत- कुण्डदर्पण  (४) अनन्त देवज्ञ कृत-"कुण्ड मर्त्तण्ड (५) विश्वनाथ कृत कुण्ड कौमुदी (६) लक्ष्मीधर भट्ठ कृत कुण्ड कारिक  (७) कुण्ड शुल्व कारिका (८) महादेव गुरुकृत-कुण्ड प्रदीप (९) रामचन्द्रचार्य कृत-कुण्डोदधि  (१०) द्विवेदी विश्वनाथ कृत...

लक्ष्मी होम बिल्ब की महत्ता

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  व्यापार वृद्धि यंत्र एवम सामान्य विधि यदि लगातार मेहनत के बाद भी आपको व्यापार में हानि हो रही है और आपको सदैव अपनी दुकान में चोरी का डर सताता रहता है तो आपको व्यापार वृद्धि यंत्र  को अपने व्यापास्थल पर स्थापित करना चाहिेए। इससे न केवल आपके व्यापार में वृद्धि होगी बल्कि व्यापार, नौकरी और रोजगार में आ रही अड़चने भी समाप्त हो सकती हैं। धन संबंधी समस्याओं से निजात पाने के लिए भी आप इस कारगर और चमत्कारी यंत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं। तंत्रशास्त्र के अनुसार इस यंत्र को धनदाता और सर्वसिद्धि दाता के नाम से जाना जाता है।  व्यापार वृद्धि यंत्र के लाभ इस यंत्र को प्रतिष्ठित करने से व्यापार में आ रही रुकावटों से निजात मिल जाती है और व्यापार में बढ़ोत्तरी भी होती है।  यदि आपको व्यापार में लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा है तो आपको अपने व्यापार स्थल पर इस यंत्र को स्थापित करना चाहिए।  कार्यस्थल पर इस यंत्र को रखने से आश्चर्यजनक धन का आगमन होता है। कोई नया व्य...

नवरात्रि हवन विधी(सामान्य)

नवरात्रि की पूजा में हवन का बड़ा महत्व है. सभी व्रती हवन जरूर करते हैं.  हवन की तिथि यानी नवमी तिथि आने से पूर्व एक चिंता भी हो जाती है कि नवरात्रि हवन कैसे करें. कोई योग्य वेदपाठी ब्राह्मण उपलब्ध नहीं होने पर वे परेशान रहते हैं. नवरात्रि में जिन लोगों ने कलश स्थापना की है उन्हें हवन के लिए परेशान होने की आवश्यकता नहीं. वे स्वयं भी हवन कर सकते हैं. यदि आपने कोई मंत्र जप संकल्पित होकर नवरात्रि में किया है तो उसका दशांश हवन कर देना चाहिए. कोई भी जप चाहे नवरत्रि का हो किसी और काल का वह बिना दशांश हवन के पूर्ण नहीं होता.  लेकिन यदि कोई विशेष मंत्र संकल्प के साथ नहीं जपा है आपने तो इसकी आवश्यकता नहीं.   दशांश हवन का अर्थ होता है कि जितना जप किया है उसका दस प्रतिशत हवन कर देना. यानी आपने यदि सवा लाख मंत्र जपे हैं तो दस प्रतिशत. यानी 12,500 आहुतियां उसी मंत्र को पढ़ते हुए दें. परंतु ये बाध्यता तभी है जब आपने संकल्प लेकर जप आरंभ किया था. यदि संकल्प लेकर आरंभ नहीं किया था तो यह बाध्यता नहीं है. अगर यथासंभव हवन कर दिया जाए तो अच्छा ही है. शास्त्रों में एक और मार्ग बताया गया है. यदि...

हवन में आहुति देते समय क्यों कहते है ‘स्वाहा’??

हवन में आहुति देते समय क्यों कहते है ‘स्वाहा’?? अग्निदेव की दाहिकाशक्ति है ‘स्वाहा’!!!!! अग्निदेव में जो जलाने की तेजरूपा (दाहिका) शक्ति है, वह देवी स्वाहा का सूक्ष्मरूप है। हव...