शक्तिपात भाग1 एवं भाग 2
*शक्तिपात सूत्र भाग-१* *१. अथातः शक्तिपातं व्याख्यास्यामः ।* अब यहाँ से हम शक्तिपात की व्याख्या करेंगे। *'अथ'* शब्द का प्रयोग मङ्गलार्थ किया जाता है। जैसा कि कहा है- *ॐकारश्चाथ शब्दश्च द्वावेतौ ब्रह्मरणः पुरा।* *कण्ठं भित्त्वा विनिर्यातौ तस्मान्माङ्गलिकावुभौ ॥* -ॐकार' और 'अथ' दोनों शब्द पहले ब्रह्माजी के कण्ठ को भेद कर बाहर निकले थे, इसलिए ये दोनों माङ्गलिक शब्द हैं।' यहाँ पर 'अथ' शब्द का प्रयोग आनन्तर्यार्थ में किया गया है। यद्यपि 'शक्तिपात' की दीक्षा ग्रहण करने के लिए किसी पूर्व साधन अथवा किसी शास्त्र के अध्ययन की अनिवार्य आवश्यकता नहीं है। जिस पर गुरु अनुग्रह करते हैं, उसी को इस की प्राप्ति हो सकती है, चाहे शिष्य शास्त्रों का विद्वान् हो, चाहे कुछ भी पढ़ा न हो, उस ने योगानुष्ठान किया हो अथवा न किया हो । बिना पूर्वानुष्ठित तैयारी की अपेक्षा के, गुरु के 'शवितपात' रूप अनुग्रह से, शिष्य की शक्ति का उद्बोधन हो जाता है । यहाँ 'शक्तिपात' के विज्ञान की व्याख्या करने का तात्पर्य यह है कि आधुनिक भौतिक विज्ञानों के अन्वेषणों के सदृश्य पू...