संदेश

सूक्त लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वरुण सूक्त

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  !!!---: वरुण-सूक्त :---!!! ==================== वरुण-सूक्त (ऋग्वेदः---१.२५) ऋग्वेद में प्रथम मण्डल का २५ वाँ सूक्त हैः--वरुण सूक्त, वरुण-सूक्त में कुल कितने मन्त्र हैः---११ वरुण-सूक्त का ऋषि है---शुनः शेप । वरुण-सूक्त का देवता हैः--वरुण देव । वरुण शब्द की उत्पत्तिः---वृञ् वरणे धातु से वरणीयः । वृञ् धातु का अर्थ है-ः--आच्छादित करना या आवृत्त करना । वरुण का निर्वचन हैः--वरुणो वृणोतीति सतः । वरुण-सूक्त का छन्द हैः---गायत्री (२४ अक्षर) । वरुण देवता का स्थान हैः---द्युलोक । भौतिक नियमों का नियन्ता कौन हैः--वरुण । वरुण का एक अन्य नाम हैः---धृतव्रत । सूर्य, अग्नि और जल की रचना किसने की हैः---वरुण ने । "उत्तम-शासक" किसे कहा गया हैः---वरुण को ।। वरुण का नेत्र हैः--सूर्य । सूर्य की तरह ही किसका रथ देदीप्यमान हैः---वरुण का । वरुण का प्रमुख अस्त्र क्या हैः---"वज्र" और "पाश" ।। वरुण का प्रधान कार्य क्या हैः---जल बरसाना ।। ब्रह्माण्ड का नैतिक अध्यक्ष कौन हैः--वरुण ।। वरुण जि...

वैदिक सूक्त

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  एक वैदिक सूक्त ॠ. 7. 60   १ यदद्य सूर्य व्रवोऽनागा उद्यन्मित्राय वरुणाय सत्यम् । वयं देवत्रादिते स्याम तब प्रियासो अर्यमन्गृणन्त: ।।   (सूर्य) हे सूर्य, हे प्रकाश ! (यत् अद्य) क्योंकि आज (उद्यन्) अपने उदयमें (अनागा:) निर्दोष होते हुए तूने (मित्राय) प्रेमके अधिपति और (वरुणाय) पवित्रताके अधिपतिके प्रति (सत्यं ब्रव:) सत्यकी घोषणा की है, इसलिए (अदिते) हे असीम माता ! (वयं) हम (तव प्रियास:) तेरे प्रिय होकर, (अर्यमन्) हे बलके अधिपति ! (तव प्रियास:) तेरे प्रिय होकर (गृणन्त:) अपने समस्त संभाषणमें (देवत्रा स्याम) देवत्वमें निवास करें । २ एष स्य मित्रावरुणा नुचक्षा उभे उदेति सूर्यो अभि ज्यन् । विश्वस्य स्थातुर्जगतश्च गोपा ऋजु मर्तेषु वृजिना च पश्यन् ।।   (मित्रावरुणा) हे मित्र ! हे वरुण ! (एष: स्व: नृचक्षा:) यह ही है वह देव जो आत्माके लिए देखता है, (सूर्य:) वह सूर्य जो (उभे अभि) द्यौ और पृथिवी दोनोंके ऊपर (ज्मन्) व्यापक विस्तारमें (उदेति) उदित होता है । (विश्वस्य...

जगद्गुरु श्रीकृष्ण का उपदेश सम्पूर्ण गीता सार बीस वाक्यों में।

जगद्गुरु श्रीकृष्ण का उपदेश सम्पूर्ण गीता सार बीस वाक्यों में। 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 हमारी जिंदगी में सुख और दुःख दोनों लगे हुए है, सुख के समय तो हम खुश रहते है लेकिन दुः...