शिव नैवेद्य निर्णय 2
हरि: ओम्, शिवनैवेद्य भक्षण निर्णय आज महाशिवरात्रि के पुण्य अवसर पर शिवनैवेद्य भक्षण सम्बन्धि विचार प्रस्तुत करते हैं। पूर्वकाल में ऋषियों को भी शिवनैवेद्य भक्षण सम्बन्धि शङ्का हुई थी तो सूतजी ने उसका निवारण किया था। ऋषयः ऊचुः अग्राह्यं शिवनैवेद्यमिति पूर्वं श्रुतं वचः ब्रूहि तन्निर्णयं बिल्वमाहात्म्यमपि सन्मुने।। १ ।। ऋषिगणों ने कहा — हमने सुना है कि शिवनैवेद्य अग्राह्य है। अत: हे मुने! उस नैवेद्य के विषय में निर्णय तथा बिल्व महात्म्य के विषय में आप ही हमें कुछ बतायें। सूत जी ने जो निर्णय दिया था उसमे जो मुख्य बातें कही वह यह है। यद्गृहे शिवनैवेद्यप्रचारोपि प्रजायते तद्गृहं पावनं सर्वमन्यपावनकारणम्।। ६ ।। जिस घर शिव नैवेद्य पहुंच जाता है वह घर भी महापवित्र है एवं वह दूसरे घर को भी महापवित्र करने में समर्थ होता है। अर्थात उस घर की पवित्रता से आस पास के घर भी पवित्र हो जाते हैं। आगतं शिवनैवेद्यं गृहीत्वा शिरसा मुदा भक्षणीयं प्रयत्नेन शिवस्मरणपूर्वकम्।। ७ ।। शिव के नैवेद्य को आया देखकर उसे शिर पर धारण करना चाहिए तथा परम प्रसन्नता से शिव का स्मरण करते हुए प्रयत्न पूर्वक उसका भ...