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राम का अर्थ

राम मन्त्र का अर्थ;- 1-र', 'आ' और 'म', इन तीनों अक्षरों के योग से 'राम' मंत्र बनता है। यही राम रसायन है। 'र' अग्निवाचक है। "आ'' बीज मंत्र है। 'म' का अर्थ है ज्ञान। यह मंत्र पापों को जलाता है, किंतु पुण्य को सुरक्षित रखता है और ज्ञान प्रदान करता है। हम चाहते हैं कि पुण्य सुरक्षित रहें, सिर्फ पापों का नाश हो। 'आ' मंत्र जोड़ देने से अग्नि केवल पाप कर्मो का दहन कर पाती है और हमारे शुभ और सात्विक कर्मो को सुरक्षित करती है। 2-'म' का उच्चारण करने से ज्ञान की उत्पत्ति होती है। हमें अपने स्वरूप का भान हो जाता है। इसलिए हम र, अ और म को जोड़कर एक मंत्र बना लेते हैं-राम। 'म' अभीष्ट होने पर भी यदि हम 'र' और 'आ' का उच्चारण नहीं करेंगे तो अभीष्ट की प्राप्ति नहीं होगी। ‘रा’ अक्षर के कहत ही निकसत पाप पहार । पुनि भीतर आवत नहिं देत ‘म’कार किंवार ।। अर्थात्—‘रा’ अक्षर के कहते ही सारे पाप शरीर से बाहर निकल जाते हैं और वे दुबारा शरीर में प्रविष्ट नहीं हो पाते क्योंकि ‘म’ अक्षर तुरन्त शरीर के सारे दरवाजे (किवाड़) ब...

राम काज लगि, तब अवतारा "

राम काज लगि, तब अवतारा " गोस्वामी तुलसीदास जी लिखित रामचरितमानस एक अनुपम ग्रंथ है जिसकी एक एक चौपाई मंत्र के समान प्रभाव रखती है। इसमें एक से बढ़ कर एक आध्यात्मिक रहस्य छिपे ...

।।श्रीमते निगमान्तवेदान्तदेशिकाय नमः।।

।।श्रीमते निगमान्तवेदान्तदेशिकाय नमः।। प्रतिष्ठां सर्वचित्राणां प्रपद्ये मणिपादुकाम् । विचित्रजगदाधारो विष्णुर्यत्र प्रतिष्ठितः ॥1।। –पादुकासहस्रं, श्रीवेद...

रावण वध के पश्चात जगतपिता ब्रह्मजी द्वारा की गयी स्तुति भावार्थ

रावण वध के पश्चात जगतपिता ब्रह्मजी द्वारा की गयी स्तुति भावार्थ * करि बिनती सुर सिद्ध सब रहे जहँ तहँ कर जोरि। अति सप्रेम तन पु‍लकि बिधि अस्तुति करत बहोरि॥ भावार्थ:-विनती क...