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श्रीमद्भागवत का एक सर्वाधिक चर्चित पात्र राजा परीक्षित!!!!!

श्रीमद्भागवत का एक सर्वाधिक चर्चित पात्र राजा परीक्षित!!!!! महाभारत के अनुसार परीक्षित अर्जुन के पौत्र, अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र तथा जनमेजय के पिता थे। जब ये गर्भ में थे तब उत्तरा के पुकारने पर विष्णु ने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उनकी रक्षा की थी। इसलिए इनका नाम 'विष्णुरात' पड़ा। भागवत (१, १२, ३०) के अनुसार गर्भकाल में अपने रक्षक विष्णु को ढूँढ़ने के कारण उन्हें 'परीक्षित, (परिअ ईक्ष) कहा गया किंतु महाभारत (आश्व., ७०, १०) के अनुसार कुरुवंश के परिक्षीण होने पर जन्म होने से वे 'परिक्षित' कहलाए। महाभारत में इनके विषय में लिखा है कि जिस समय ये अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में थे, द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा ने गर्भ में ही इनकी हत्या कर पांडुकुल का नाश करने के अभिप्राय से ऐषीक नाम के अस्त्र को उत्तरा के गर्भ में प्रेरित किया जिसका फल यह हुआ कि उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का झुलसा हुआ मृत पिंड बाहर निकला।  श्रीकृष्ण को पांडुकुल का नामशेष हो जाना मंजूर न था, इसलिये उन्होंने अपने योगबल से मृत भ्रूण को जीवित कर दिया। परिक्षीण या विनष्ट होने से बचाए जाने के कारण...

यमराज की मृत्यु कैसे हुई?

यमराज की मृत्यु कैसे हुई? 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ यमराज को मृत्यु का देवता माना जाता है यदि यमराज स्वयं मृत्यु के देवता हैं तो इनकी मृत्यु कैसे संभव है? यह बात हास्यप्रद सी लगती है परंतु वेद और पुराण में इनकी मृत्यु की एक कथा बताई गई है. इसको बताने से पहले यमराज के बारे में कुछ जान लेना बहुत जरूरी है. यमराज की एक जुड़वा बहन थी जिसे यमुना भी कहा जाता है. यमराज भैंसे की सवारी करते हैं और यमराज की आराधना विभिन्न नामों से की जाती है जैसे कि यम, धर्मराज मृत्यु, आतंक, वैवस्वत और काल. बहुत समय पहले एक श्वेत मुनि थे जो भगवान शिव के परम भक्त थे और गोदावरी नदी के तट पर निवास करते थे जब उनकी मृत्यु का समय आया तो यम देव ने उनके प्राण लेने के लिए मृत्यु पास को भेजा लेकिन श्वेतमुनि अभी प्राण नहीं त्यागना चाहते थे तो उन्होंने महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुरू कर दिया. जब मृत्यु पाश श्वेत मुनि के आश्रम में पहुंचे तो देखा कि आश्रम के बाहर भैरो बाबा पहरा दे रहे हैं. धर्म और दायित्व में बंधे होने के कारण जैसे ही मृत्यु पास ने मुनि के प्राण हरने की कोशिश की तभी भैरव बाबा ने प्रहार करके मृत्यु पास को मुर्छित कर...

अद्भुत अलौकिक भोग

*💥अद्भुत अलौकिक भोग 💥* . एक गाँव के बाहर छोटा सा शिव मंदिर था, जिसमें एक वृद्ध पुजारी रहते थे। एक दिन एक गरीब माँ अपने नन्हे से बालक को मंदिर के द्वार पर छोड़कर चली गई। बहुत खोजन...

लघुकथा

किसी गाँव में एक चोर रहता था। एक बार उसे कई दिनों तक चोरी करने का अवसर ही नहीं मिला, जिससे उसके घर में खाने के लाले पड़ गये। अब मरता क्या न करता, वह रात्रि के लगभग बारह बजे गाँव क...

राम नाम की महिमा

राम नाम की महिमा * पापिउ जाकर नाम सुमिरहीं। अति अपार भवसागर तरहीं॥ तासु दूत तुम्ह तजि कदराई राम हृदयँ धरि करहु उपाई॥ पापी भी जिनका नाम स्मरण करके अत्यंत पार भवसागर से तर जा...