प्रेम श्रद्धा करुणा
प्रेम , श्रद्धा , करुणा -- यह तीनों के बिना मनुष्य परेशान रहता है । किन्तु हर किसी को पता नहीं होता कि वह इन तीन के अभाव से व्यथित हैं । जीवन में अथाह व्यथा ही क्यों न हो ! प्रातः काल उठकर गौ माता के पास शान्त-चित्त होकर केवल बैठ जाना चाहिए । आप कुछ खिलाओ या नहीं , उनपर प्रेम से हाथ फेरों या नहीं , यह कोई मायने नहीं रखता । क्योंकि यह तो आपके श्रद्धा से अधिक मानवता पर निर्भर करता है । बस आप उन्हें देखो । उनका दर्शन करो । उन्हें देखने से ही आपके हृदय के किसी कोने में सोया हुआ जो सुषुप्त प्रेम है , वह अपने आप जाग उठेगा जैसे प्रातः कालीन सूर्य-रश्मियों का दर्शन करते ही सरोवरों के कमल खिल जाते हैं । जिस प्रकार कमलों के खिलते ही उनके पराग से वातावरण सुगन्धित हो जाता है , ठीक उसी प्रकार हृदय का प्रेम जागृत होते ही वहां श्रद्धा की धारा स्वतः बहने लगती है । प्रेम और श्रद्धा भी अधूरे और अनाथ हैं , यदि उनके ऊपर किसी की करुणा न हो । तब आप गौ माता के नेत्रों में देखना । सारे विश्व की ममता , सारे ब्रह्माण्ड की करुणा उनके नेत्रों में उतर आया होगा । गौमाता के नेत्रों में करुणा क...