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स्नान

#स्नान_एक_पवित्र_सनातनी_परम्परा!! --स्नान किये विना जो पुण्यकर्म किया जाता है वह निष्फल होता है।उसे राक्षस ग्रहण करते है।। --दुःस्वप्न देखने,हजामत बनवाने (क्षोरकर्म)वमन होने स्त्री संग करने और श्मशान भूमि में जाने पर वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए। --तेल लगाने के बाद ,श्मशान से लौटने पर, स्त्रीसंग करने पर ,क्षोरकर्म करने के बाद जब तक मनुष्य स्नान नही करता ,तब तक बह चांडाल बना रहता है।।:  4--यदि नदी हो तो जिस ओर से उसकी धारा आती हो उसी ओर मुंह करके तथा दूसरे जलाशय में सूर्य की ओर मुंह करके स्नान करना चाहिए। ----कुएं से निकाले हुए जल की अपेक्षा झरने का जल पवित्र होता है।उससे पवित्र सरोवर का,उससे भी पवित्र नदी नद का जल बताया गया है।तीर्थ का जल उससे भी पवित्र होता है ओर गङ्गा का जल तो सबसे पवित्र माना गया है। ---भोजन के बाद,रोगी रहने पर,महानिशा(रात्रि के मध्य दो पहर)में बहुत वस्त्र पहने हुए और अज्ञात जलाशय में स्नान नही करना चाहिए।। --रात्रि के समय स्नान नही करना चाहिए,सन्ध्या के समय भी स्नान नही करना चाहिए। परन्तु---सूर्यग्रहण अथवा चंद्रग्रहण के समय रात्रि में भी स्नान कर सकते है। नोट--...

कब स्नान नही करना चाहिए

🔶स्नान विचार 🔶 #न_स्नानमाचरेत्_भुक्त्वा_नातुरो_न_महानिशि ।  #न_वसोभिः_सहाजस्रं_ना_विज्ञाते_जलाशये ।।                       ♦️मनुस्मृति♦️ #निशायां_चैव_न_स्नायात्सन्ध्यायां_ग्रहणं_विना ।                   ♦️स्कन्दपुराण♦️  #पुत्रजन्मनि_योगेषु_तथा_संक्रमणे_रवेः । #रहोश्च_दर्शने_स्नानं_प्रशस्तं_निशि_नान्यथा ।।                   ♦️गरूडपुराण♦️  भोजन के बाद , रोगी रहने पर , मध्यरात्रि मे , तथा अज्ञात जलाशय मे स्नान नहि करना चाहिए । रात्रि काल तथा दोनो संध्या काल मे स्नान नहि करना चाहिए परंतु ग्रहण लगने पर रात्रि मे स्नान कर सकते है । पुत्रजन्म , सूर्यसंक्रांति , स्वजन कि मृत्यु , ग्रहण लगने पर रात को भी स्नान कर सकते है ।                        🙇#जयश्रीसीताराम🙇