अंगारक योग
जन्म कुंडली में क्या होता है अंगारक योग और क्या है उसके प्रभाव वैदिक ज्योतिष के अनुसार अंगारक योग का निर्माण किसी भी कुंडली में उस स्थिति में होता है, जब एक ही भाव में मंगल ग्रह के साथ राहु अथवा केतु उपस्थित हों। इसके अलावा, यदि मंगल का दृष्टि सम्बन्ध भी राहु अथवा केतु से हो रहा हो तो भी इस योग का निर्माण हो सकता है। आमतौर पर अंगारक योग को एक बुरा और अशुभ योग माना जाता है और इससे जीवन में समस्याओं की बढ़ोतरी होती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार अंगारक दोष बुरे योगों में सम्मिलित किया गया है। अंगारक की प्रकृति से समझें तो अंगारे जैसा फल देने वाला योग बनता है। यह जिस भी भाव में बनता है, उस भाव के कारकत्वों को नष्ट करने की क्षमता रखता है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन आते हैं, और उसमें गुस्से की अधिकता हो सकती है। यह योग व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है और वह अपने क्रोध तथा दुर्घटना आदि के कारण समस्याओं को निमंत्रण देता है। मंगल को भाई का कारक कहा जाता है, इसलिए इस योग के प्रभाव से कई बार व्यक्ति की अपने भाइयों से नहीं बनती तथा दुर्घटना होने की संभावना...