समता का भाव
●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों------- 🌺दृष्टि में समता का भाव🌺दृष्टि सम कैसे हो?सर्व प्रथम अपने भीतर यह भाव दृढ रहना चाहिए कि''मैं साधक हूँ''परमात्मा का जिज्ञासु हूँ''और एक बात यह कि सब में परमात्मा है। सब में परमात्मा को कैसे देखें?इस बात पर थोङा ध्यान देने की आवश्यकता है।मनुष्य है --इसमें जो ''है''---पना है सत्ता है,वह कभी मिटती नहीं।वह बुरा हो या भला हो,दुराचारी हो या सदाचारी हो,उसमें जो ''है''--पना हैवह मिटेगा क्या?उत्तम से उत्तम वस्तुओं में भी वह ''है''--पना है और जो निम्न से निम्न दृष्टिगोचर होती है उसमें भी ''है''--पना है।उन वस्तुओं का रूप बदल जाता है पर ''है'--पना(सत्ता)नहीं बदलता।कूङा करकट को जला दो तो वह राख बन जाएगा।पर उसकी सत्ता दूसरी नहीं हो जाएगी।वह सत्ता परमात्मा की है।उस सत्ता की तरफ दृष्टि रखनी चाहिए।जो परिवर्तन होता है वह प्रकृति में होता है।🌸संक्षेप में प्रकृति का स्वरूप बताऐं तो एक वस्तु और एक क्रिया---ये द...