संदेश

दुर्गा सप्तसती लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

डामर तंत्र संपुर्ण कुंजिका स्त्रोत पाठ विधी

संपुर्ण कुंजिका स्त्रोत पाठ विधी सम्पूर्ण दुर्गा सप्तशती पाठ के समान फलदायी है सिद्ध कुंजिकास्तोत्र- अद्भुत प्रभाव वाला है यह सिद्ध कुंजिका स्तोत्रः सिद्धकुंजिका स्तोत्र को आप पावरहाउस समझ सकते हैं। यदि विधि-विधान से इसकी सिद्धि कर ली तो आपमें बहुत से चमत्कारी प्रभाव दिखने लगेंगे। मात्र 21 दिनों में इसकी साधना की एक सरलतम विधि जानिए। सिद्ध कुंजिका स्तोत्र की साधना किसी भी नवरात्रि से या किसी भी माह की दुर्गाष्टमी से शुरू की जा सकती है। -प्रातः उठकर स्नान आदि के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें कोई लाल वस्त्र जरूर रखें। -आसन बिछाकर पूर्व दिशा की मुंह करके बैठ जाएं और सामने भगवती का कल्याणकारी चित्र स्थापित कर दें जिसमें माता शेर पर सवार हैं। -फिर दुर्गा यंत्र यदि हो तो उसे जल से स्नान कराकर, विधिवत पूजा करके स्थापित कर दें। -उस पर कुंकुम, अक्षत, लाल पुष्प चढाएं, घी का दीपक व धूपबत्ती लगा देँ। -फिर सिद्ध कुंजिकास्त्रोत्र का रोज 108 बार पाठ लगातार 21 दिन तक करें। -फिर 21वें दिन पाठ समाप्त कर एक, तीन, पांच या नौ कुमारी कन्याओं को भोजन कराएं और यथोचित वस्त्र दक्षिणा आदि दें। -साधना के दौरान पूर्ण...

गुप्त-सप्तशती

ॐ-- *गुप्त-सप्तशती*--ॐ सात सौ मन्त्रों की ‘श्री दुर्गा सप्तशती, का पाठ करने से साधकों का जैसा कल्याण होता है, वैसा-ही कल्याणकारी इसका पाठ है। यह ‘गुप्त-सप्तशती’ प्रचुर मन्त्र-बीजों के होने से आत्म-कल्याणेछु साधकों के लिए अमोघ फल-प्रद है। इसके *पाठ का क्रम* इस प्रकार है। प्रारम्भ में *‘कुञ्जिका-स्तोत्र’* , उसके बाद *‘गुप्त-सप्तशती’* , तदन्तर *‘स्तवन‘* का पाठ करे। *कुञ्जिका-स्तोत्र म् अथवा सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् ॥* श्री गणेशाय नमः । ॐ अस्य श्रीकुञ्जिकास्तोत्रमन्त्रस्य सदाशिव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीत्रिगुणात्मिका देवता, ॐ ऐं बीजं, ॐ ह्रीं शक्तिः, ॐ क्लीं कीलकम्, मम सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । शिव उवाच श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्‌। येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्‌॥1॥ न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्‌। न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्‌॥2॥ कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्‌। अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्‌॥3॥ गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति। मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्‌। पाठमात्रेण संसिद्ध्‌येत् कुञ्जिकास्...