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पंचाक्षर मन्त्र के ऋषि, छन्द, देवता और ध्यान :-

पंचाक्षर मन्त्र के ऋषि, छन्द, देवता और ध्यान :- पंचाक्षर मन्त्र के ऋषि वामदेव, छन्द पंक्ति व देवता शिव हैं। आसन लगाकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके इस मन्त्र का जप करना चाहिए। रुद्राक्ष की माला से जप का अनन्तगुणा फल मिलता है। स्त्री, शूद्र आदि सभी इस मन्त्र का जप कर सकते हैं। इस मन्त्र के लिए दीक्षा, होम, संस्कार, तर्पण और गुरुमुख से उपदेश की आवश्यकता नहीं है। यह मन्त्र सदा पवित्र है | लिंगपुराण में कहा गया हैं ‘जो बिना भोजन किए एकाग्रचित्त होकर आजीवन इस मन्त्र का नित्य एक हजार आठ बार जप करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है’। इस मन्त्र के लिए लग्न, तिथि, नक्षत्र, वार और योग का विचार नहीं किया जाता। यह मन्त्र कभी सुप्त नहीं होता, सदा जाग्रत ही रहता है। अत: पंचाक्षर मन्त्र ऐसा है जिसका अनुष्ठान सब लोग सब अवस्थाओं में कर सकते हैं। श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्र के पाँचों श्लोकों में क्रमशः न, म, शि, वा और य, मुख्यतः पांच शब्दों का वर्णन हैं। न, म, शि, वा एवं य अर्थात् "नम: शिवाय"। अतः यह पंचाक्षर स्तोत्र शिवस्वरूप है। जो कोई शिव के समीप इस पवित्र पंचाक्षर मंत्र का नित्य ध्यान अथवा ...