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अघोर

Aachary Rudreshwaran: ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  || अघोर || बड़ी विचित्र और गलत धारणा है, की भभूत डाल ली, रुद्राक्ष पहनें लिया  काले पीले वस्त्र लपेट लिए, मांस, मदिरा का भक्षण करना, मुंड माला, खोपड़ी धारण कर ली तोह यह अघोर, बन गए अघोरी, बन गए सिद्ध, अघोर कोई अलग थलग मार्ग नहीं, सभी अघोर है, सम्पूर्ण जगत अघोर है, शिव, शक्ति, राम, कृष्ण आदि से ले कर बुद्ध, महावीर, मूसा, ईसा और मोहमद, यह जितने पूर्ण हुए, वह अघोर ही है, और आगे भी अनेकों होते रहेंगे, अघोर वस्त्र नहीं, अघोर कोई वेष भूषा नहीं, अघोर सृष्टि से सामरस्य होने की अवस्था है, स्थितिप्रज्ञ होना ही अघोर है, भेद और तिरस्कार रहित स्वछंद और परिपूर्ण हो, दसो दिशाओं में "में ही में" हूं, और कोई नहीं, "सभी मुझसे है, में सभी से" इसी भाव को अघोर कहा गया है, अघोर शब्द बना है अ + घोर, "घोर" का अर्थ है कठिन, उत्पात, भयंकर, या सरल भाषा में (Complicated) और "अ" लगाने से उसका विपरीत, अर्थात जो कठिन नहीं, उत्पाति नहीं, भयंकर नहीं, complicated...