संदेश

ओम लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ओम निरंजन

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  ऊँ निरंजन निराकार मनुष्य मेँ दो प्रकार के व्यक्तित्व हैँ-अंतरमुखी और बहिर्मुखी । बहिर्मुखी के लिए कर्म व भक्ति मार्ग अनुकूल पडता है तथा अंतरमुखी के लिए ध्यान । यदि यह ग्यान कर लिया कि मैँ शरीर, मन आदि नहीँ हूँ , बल्कि शुद्ध चैतन्य आत्मा हूँ तो सारी भ्राँतियां मिट जाती हैँ व यही मोक्ष है । मोक्ष कोई स्थान नहीँ बल्कि चित्त की एक अवस्था है जिसमेँ स्थित हुआ जीव परमानन्द की अनुभूति करता है । अपने कर्म को सच्चाई ईमानदारी पूर्ण निष्ठा व लगन के साथ करने वाला भी स्वर्ग का अधिकारी होता है । फिर यदि निष्काम भाव से, लोकहितार्थ, ईश्वर की आग्या समझ कर जो समर्पण भाव से कर्म करता है उसके वे कर्म बंधन का कारण नहीँ बनते । अहंकार वश अपने स्वार्थ के लिए जो कर्म किये जाते हैँ वे ही बंधन का कारण बनते हैँ ।यह आध्यात्म एक ऐसी धरोहर है जिसके बारे मेँ कुछ कहना सूर्य को दीपक दिखाना है ।  यह समझने के लिए नहीँ पीने व पचाने के लिए है                 ...