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किस बृक्ष को काटने से कौन सा पाप लगता है

विश्वकर्मप्रकाश,वास्तुरत्नाकर,वृहत्संहिता आदि ग्रन्थों में पेड़ कब और कैसे काटा जाय- इस विषय की भी चर्चा है- *द्व्यङ्गराशिगते सूर्ये माघे भाद्रपदे तथा।* *वृक्षाणां छेदनं कार्यं सञ्चयार्थं न कारयेत्।।* *सिंहे नक्ते च दारुणां छेदनं नैव कारयेत्।* *ये मोहाच्च प्रकुर्वन्ति तेषां गेहेऽग्नितो भयम्।।* अर्थात् द्विस्वभाव(मिथुन,कन्या,धनु,मीन)राशियों में सूर्य के रहने पर (विशेषकर भाद्र और माघ मास में) वृक्ष काटना चाहिए,किन्तु संचय के लिए काटना उचित  नहीं है।यानी शीघ्र प्रयोग के लिए काटा जा सकता है।पुनः कहते हैं कि सिंह और मकर के सूर्य रहने पर उक्त महीनों में भी गृहकार्यार्थ वृक्षछेदन नहीं करना चाहिए।अज्ञान,या स्वार्थ वश यदि ऐसा करता है तो उसे अग्नि का कोपभाजन बनना पड़ता है।यानी अग्निभय की आशंका रहती है। *सौम्यं पुनर्वसुं मैत्रं करं मूलोत्तरात्रये।* *स्वाती च श्रवणं चैव वृक्षाणां छेदने शुभम्।।* अर्थात् मृगशिरा,पुनर्वसु,अनुराधा,हस्ता,मूल,उत्तराफाल्गुनी,उत्तराषाढ़,उत्तरभाद्रपद, स्वाती,और श्रवण- इन दस नक्षत्रों में पेड़ काटना उत्तम होता है।   चन्द्रमा के दस नक्षत्रों की चर्चा करके अब अगले श्...