स्त्रियों को प्रवचन अधिकार क्यों नही है
●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों------- पुनः प्रशारण। जब शासकों के शासक पूज्य श्री शंकराचार्यों जी ने बार बार कहा है कि व्यासपीठ पर स्त्री का अधिकार नही है और वेदों और पुराणों में भी कहा गया है कि केवल विरक्त ब्राह्मण जो कि वैष्णव हो वही व्यासपीठ पर बैठ सकता है ,तब ये 2 रुपए की ख्याति प्राप्त करने के लिए ये स्त्रियां क्यूं शास्त्र की अवमानना कर रही है । अपने कर्तव्य का पालन और दूसरे के अधिकार की रक्षा करने से ही परमार्थ में सिद्धि मिलती है । किन्तु जब अपने कर्तव्य का ज्ञान ही नही रहता और दूसरे के अधिकार पाने की कामना मन मे जगने लगती है( दूसरे की थाली में लड्डू बड़ा लगने लगता है ) तब पारमार्थिक सिद्धि तो दूर की बात लौकिक उत्कर्ष को भी मनुष्य प्राप्त नही होता है । व्यासपीठ केवल शेरो शायरी करने के लिए नही है । व्यासपीठ की एक गरिमा है जिसे बनाये रखना बहुत आवश्यक है । वर्तमान में जहां राजपीठ का शोधन आवश्यक वही व्यासपीठ का भी शोधन परम् आवश्यक है । क्यूं स्त्रियों को व्यसपीठ का अधिकार नही है !! ये कारण देखे?...