गंड मूल नक्षत्र
२७ नक्षत्र में से ६ नक्षत्र ऐसे है जिन्हें गंड मूल नक्षत्र कहा जाता है जैसे : अश्विनी नक्षत्र , अश्लेशा , माघ, ज्येष्ठ , मूला, रेवती। इनमे से ३ नक्षत्र अश्विनी , माघ,मूला इसके स्वामी केतु है, तथा अश्लेशा,ज्येष्ठ , रेवती, इनके स्वामी बुध है, इन नक्षत्र को गंड मूल कहा जाता है, गंड: गंड हम उस शब्द को कहते है जहा राशि और नक्षत्र एक साथ समाप्त होता है , तथा दूसरे राशि से नक्षत्र का आरम्भ होता है उसको हम मूल कहते है, और इसका पौराणिक कारण यह है की : - अश्वनी नक्षत्र के चारो चरण मेष राशि में आएगा तथा मेष राशि का स्वामी मंगल एक अग्नि प्रधान गृह है - अश्लेशा नक्षत्र जिसका चारो चरण कर्क राशि में समाप्त होता है जो जल तत्त्व राशि है तथा चंद्रमा इसके बाद अपना संचार सिंह राशि में तथा माघ नक्षत्र में करता है जो को अग्नि तत्त्व राशि है , अर्थात कर्क से सिंह राशि जो की अग्नि तत्त्व राशि है , जल से अग्नि की और चंद्रमा अग्रसर होता है - फिर वृस्चक राशि में ज्येष्ठ के चारो चरण जो धनु राशि तथा मूला नक्षत्र की और चंद्रमा अग्रसर होता है , अर्थात अग्नि तत्त्व (वृस्चक राशि) की और से धनु वायु तत्त्व की और जाता है...