सृष्टि तत्व और शारीरिक संरचना
सृष्टि-तत्त्व और शरीर-संरचना 〰️〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️〰️ मूल प्रकृति सबसे पहले बुद्धि, फिर अहङ्कार, फिर 5 तन्मात्राओं (सूक्ष्मभूतों), 5 ज्ञानेन्द्रियों, 5 कर्मेन्द्रियों और मन, फिर तन्मात्राओं से 5 स्थूलभूतों (आकाश, वायु, तेज, जल और पृथिवी) में परिवर्तित होती है। अब इन तत्त्वों से हम शरीर की रचना को समझते हैं। शरीर के प्रकार 〰️〰️〰️〰️〰️ प्रत्येक जीव के 4 प्रकार के शरीर होते हैं । वे इस प्रकार हैं 1👉 स्थूल शरीर👉 जो हमें साक्षात् दिखता है। आंखों से दिखता, कानों से सुनाई पड़ता (वाणी, ताली, आदि), नाक से सूंघने में आता, जिह्वा से स्वाद लेने में आता और त्वचा से छूने में आता है । इसी शरीर को सर्जन काटकर देख सकता है । 2👉 सूक्ष्म शरीर👉 यह शरीर सूक्ष्म-तत्त्वों से बना होता है । इसलिए इन्द्रियगोचर नहीं होता। इसके दो विभाग होते हैं- स्थूल देह हड्डी और मांस का बना है. उसके भीतर सूक्ष्म देह है, जो अन्तःकारण चतुष्टय (मन, बुद्धि,चित, अहंकार) से बना है. इसी में हमारे प्रारब्ध कर्म का भी वास है. पूर्व जन्म के कर्मों में जिन कर्मों का फल इस जन्म में भोगना पड़ता है वे प्रारब...