शिव नैवेद्य निर्णय
*श्रीशिवनिर्माल्य-निर्णय* शिवनैवेद्य के विषय में शिवपुराणादि ग्रन्थों में विस्तार से निरूपण है, इसके पूर्व अनेक विशिष्ट विद्वान् भी विचार कर इस विषय में शास्त्रीय सिद्धान्त प्रकाशित कर चुके हैं तथापि कुछ लोग शास्त्रीय सिद्धान्त की अनभिज्ञता के कारण इस विषय में भ्रम में पड़े रहते हैं, इसलिये इस सम्बन्ध में यहाँ कुछ विचार किया जा रहा है। | *शिवनैवेद्य-ग्रहण की प्रशंसा* शिवपुराण - विद्येश्वरसंहिता के 22 वें अध्याय में शिव - नैवेद्य की प्रशंसा करते हुए लिखा है - *दृष्ट्वापि शिवनैवेद्यं यान्ति पापानि दूरतः।* *भुक्ते तु शिवनैवेद्ये पुण्यान्यायान्ति कोटिशः।।* *अलं यागसहस्रेणाप्यलं यागार्बुदैरपि।* *भक्षिते शिवनैवेद्ये शिवसायुज्यमाप्नुयात्।।* *आगतं शिवनैवेद्यं गृहीत्वा शिरसा मुदा।* *भक्षणीयं प्रयत्नेन शिवस्मरणपूर्वकम्।।* *न यस्य शिवनैवेद्यग्रहणेच्छा प्रजायते।* *स पापिष्ठो गरिष्ठः स्यान्नरके यात्यपि ध्रुवम्।।* *शिवदीक्षाऽन्वितो भक्तो महाप्रसादसंज्ञकम्।* *सर्वेषामपि लिङ्गानां नैवेद्यं भक्षयेच्छुभम्।।* | (शि. पु. विद्ये. सं. 22/4-5, 7, 9, 8) अर्थात् - शिव के नैवेद्य को देख लेनेमात्र से ...