साधना काल के कुछ प्रश्न
सर्प से निर्भय रहने और भगाने का मंत्र 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आपको आश्चर्य होगा, यह जानकर कि साँप सुन नहीं सकता, क्योंकि इसके कान ही नहीं होते हैं, बीन द्वारा सपेरा हमेंभिरम में रखने हेतु साँप के आगो बीन बजाता है ! आपने यह भी देखा होगा, कि सपेरा बीन बजाने के दौरान साँप को बीच-बीच में हाथ मारकर साँप को क्रोध दिलाता है, ताँकि साँप अपना फन उठाकर रखे, बस सपे की यही चाल कामयाब हो जाती है तथा आसपास खड़े व्यक्ति समझते हैं कि साँप बीन पर नाच रहा है ! किंतु एक नाम ऐसा है, जिसे यदि सर्प अथवा साँप के आगे उच्चारित कर लिया जाए, निश्चय ही साँप वहाँ से दुम-दुमाकर भाग खड़ा होगा ! जी हाँ ! यह बिल्कुल सच्च है, चाहे तो कभी परिक्षा करके स्वयँ ही इस सच्चाई की पुष्टि कर सके हैं ! इसी संदर्भ में एक प्रसंग प्रस्तुत है, जिसमें आपको यह भी ज्ञात हो जाएगा कि किसका नाम सेनो से सर्प वापिस भाग जाता है ! अर्जुन के पौत्र अर्थात अभिमन्यु के पुत्र 'राजा परिक्षित' ने एक बार कलियुग के प्रभाव से एक मरा हुआ सर्प ध्यान मग्न एक ऋषि के गले में डाल दिया था ! जिससे ऋषि पुत्र ने क्...