श्री सुदर्शन महा कवच
नमस्ते मित्रों , समस्त जगत विषाणु ग्रस्त होने के कारण व्यक्ति भय के अधीन हो जाता हैं , विषाणु भी एक बाधित वासनिक आत्मा ही हैं । सूक्ष्म विषाणु की ओरा एक मजबूत आदमी की ओरा को भी भेद देती हैं । इसलिए व्यक्ति के त्वचा के ऊपर एक दैवीय ऊर्जा होनी चाहिए । इसको ध्यान में रखकर नीचे 👇 जो कवच दिया है , उसे रोजाना कुछ दिन पढ़िए। शरीर का तेज और रक्षा के लिए काफी मजबूत कवच हैं । ।। श्री सुदर्शन महकवचं ।। विनियोग : ॐ अस्य श्री सुदर्शन कवच माला मंत्रस्य श्री लक्ष्मी नृसिंह: परमात्मा देवता क्षां बीजं ह्रीं शक्ति मम कार्य सिध्यर्थे जपे विनयोग:। करन्यास हृदयादि न्यास: ॐ क्षां अन्गुष्ठाभ्याम नम: हृदयाय नम: ॐ ह्रीं तर्जनीभ्याम नम: शिरसे स्वाहा ॐ श्रीं मध्यमाभ्याम नम: शिखाए वषट ॐ सहस्रार अनामिकभ्याम नम: कवचाय हुम ॐ हुं फट कनिष्ठिकाभ्याम नम: नेत्रत्रयाय वौषट ॐ स्वाहा करतल-कर प्र्ष्ठाभ्याम नम: अस्त्राय फट ध्यानं :- उपसमाहे नृसिंह आख्यम ब्रह्म वेदांत गोचरम। भूयो-लालित संसाराच्चेद हेतुं जगत गुरुम।। पंचोपचार पूजनं : लं पृथ्वी तत्वात्मकम गंधंम समर्पयामि हं आकाश तत्वात्मकम...