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विवाह के सिद्ध उपाय

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  व्यक्ति की जन्मकुंडली से यह ज्ञात किया जा सकता है कि किन दोषों व किन दशाओं के कारण विवाह में बाधाएं आ रही हैं और उचित उपायों के माध्यम से इन सभी बाधाओं को दूर भी किया जा सकता है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ विवाह बाधा दूर करने के उपाय बता रहे हैं,  जिनसे विवाह में होने वाले विलंब व अवरोधों को दूर किया जा सकता है। विवाह में देरी के उपाय/मंत्र: विवाह में आने वाली अड़चनें तथा गृह दोष आदि के निवारण के लिए कुछ मंत्र व साधनाएं प्रचलित हैं; जिनका जाप पूरा कर के आप अपने विवाह में आने वाली मुश्किलों को दूर कर सकते हैं। 1- अगर किसी कन्या के विवाह में विलंब हो रहा है, तो हर गुरूवार के दिन बरगद, केले या पीपल के वृक्ष पर बिना नागे के जल चढ़ाएं तथा निम्नलिखित मंत्र का जाप करें- “गौरी आवे ,शिव जो ब्याहवे, (लड़की का नाम) का विवाह तुरंत सिद्ध करें, देर ना करें, जो देर होए, तो शिव को त्रिशूल पड़े। गुरु गोरखनाथ की दुहाई फिरै।” शिव पार्वती जी का यह मंत्र जीवन के दोषों को समाप्त कर, विवाह का...

विवाह में गोत्र, गण तथा प्रवर का शास्त्रीय विचार------------------------------------------------------------

नमो धर्माय महते वेदाय च स्वयम्भुवे । ऋषिभ्यश्च ब्राह्मणेभ्यो वेदविद्भ्यो नमोनमः।। वैदिक-सनातन-वर्णाश्रमधर्म में शास्त्रानुसार-- समान-गोत्र में विवाह निषेध है। समान-गण में विवाह निषेध है। समान-प्रवर में विवाह निषेध है। समान प्रवर का विशेष नियम- पञ्चानां त्रिषु सामान्यादविवाहस्त्रिषु द्वयोः । भृग्वङ्गिरो-गणेष्वेवं शेषेष्वेकोऽपि वारयेत्।।-प्रावरिकासूत्रम्। भृगु तथा अङ्गिरोगण में अधिक प्रवर अर्थात् ५ में ३ तथा ३ में २ प्रवर समान होने पर समानप्रवर माना जाता है और विवाह नहीँ होता है। कम प्रवर अर्थात् ५ में २ तथा ३ में १ प्रवर समान होने पर विवाह हो सकता है । अवशिष्ट अन्य सभी गणों में अर्थात् वसिष्ठ, कश्यप, भरद्वाज, विश्वामित्र, अत्रि, अगस्त्य - इन गणों  में तो ५ प्रवरों में से १ अथवा ३ प्रवरों में से १ प्रवर समान होने पर भी समानप्रवर माना जाता है और विवाह निषिद्ध होता है। इति वैदिकशास्त्रव्यवस्था।            

विवाह के सूत्रधार ग्रह: गुरु, शुक्र व मंगल

विवाह के सूत्रधार ग्रह: गुरु, शुक्र व मंगल  〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 जब किसी व्यक्ति की कुण्डली से दांपत्य का विचार किया जाता है, तो उसके लिये गुरु, शुक्र व मंगल का विश्लेषण किया जाता है. इन तीनों ग्रहों कि स्थिति को समझने के बाद ही व्यक्ति के दांपत्य जीवन के विषय में कुछ कहना सही रहता है. आईये यहां हम दाम्पत्य जीवन से जुडे तीन मुख्य ग्रहों को समझने का प्रयास करते है. 1👉 गुरु की वैवाहिक जीवन में भूमिका 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰  सुखी दाम्पत्य जीवन के लिये भावी वर-वधू की कुण्डली में गुरु पाप प्रभाव से मुक्त होना चाहिए. गुरु की शुभ दृ्ष्टि सप्तम भाव पर हों तो वैवाहिक जीवन में परेशानियों व दिक्कतों के बाद भो अलगाव की स्थिति नहीं बनती है. अर्थात गुरु की शुभता वर-वधू का साथ व उसके विवाह को  बनाये रखती है. गुरु दाम्पत्य जीवन की बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ, संतान का कारक ग्रह भी है. अगर कुण्डली में गुरु पीडित हों तो सर्वप्रथम तो विवाह में विलम्ब होगा, तथा उसके बाद संतान प्राप्ति में भी परेशानियां आती है. सुखी दाम्पत्य जीवन के लिये संतान का समय पर होना आवश्यक समझा जाता है. विवाह के बा...

विवाह के सात वचन

*🌹विवाह के 7 पवित्र वचन और महत्व🌹* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *⭕विवाह के समय पति-पत्नी अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे को सात वचन देते हैं जिनका दांपत्य जीवन में काफी महत्व होता है। आज भी यदि इनके महत्व को समझ लिया जाता है तो वैवाहिक जीवन में आने वाली कई समस्याओं से निजात पाई जा सकती है।* *विवाह समय पति द्वारा पत्नी को दिए जाने वाले सात वचनों के महत्व को देखते हुए यहां उन वचनों के बारे में जानकारी दी जा रही है।*   *1. तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:।* *वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी ।।*   (यहां कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने संग लेकर जाना। कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धर्म कार्य आप करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग में अवश्य स्थान दें। यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।)   किसी भी प्रकार के धार्मिक कृत्यों की पूर्णता हेतु पति के साथ पत्नी का होना अनिवार्य माना गया है। पत्नी द्वारा इस वचन के माध्यम से धार्मिक कार्यों में पत्नी की सहभा‍गिता व महत्व को स्पष्ट ...

विवाह के प्रकार

विवाह के प्रकार 🔸🔸🔹🔸🔸 १👉 ब्रह्म विवाह दोनो पक्ष की सहमति से समान वर्ग के सुयोज्ञ वर से कन्या का विवाह निश्चित कर देना 'ब्रह्म विवाह' कहलाता है। सामान्यतः इस विवाह के बाद ...