भक्ष अभक्ष का निर्णय
۞ஜ▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬ஜ۞ * हर हर महादेव* ●▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬● प्रिय पाठकों ..... राक्षसों का भोजन ❓ राक्षस बोले ! -- " महर्षियों हम भूख से पीड़ित हैं - सनातन धर्म से भ्रष्ट हो गये हैं " " न च नः कामकारोऽयं यद् वयं पापकारिणः । युषमाकं चाप्रसादेन दुष्कृतेन च कर्मणा ।। यत् पापं वरूधतेऽस्माकं ततः स्मो ब्रह्मराक्षसाः । अर्थात् --- हम पापाचार करते हैं - यह हमारा स्वेच्छाचार नहीं है - आप जैसे महात्माओं की हम पर कभी कृपा ही नहीं हुई और हम सदा दुष्कर्म ही करते चले आये - इससे हमारे पाप की निरन्तर वृद्धि होती रहती है और हम ब्रह्मराक्षस हो गये हैं । ( इसीलिए जिस घर जिन मनुष्यों को संत समागम या संत सेवा का अवसर नहीं मिलता और अगर मिलता भी है तो करते नहीं वे राक्षसी प...