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सूर्य उपासना

☀️ *सर्वमनोकामनाओं के सिद्धिदाता श्री सूर्यदेव की उपासना* ☀️ मानव संस्कृति के चलन में आने के बाद से ही धर्मशास्त्रों के आधार पर मनुष्य का जीवन अग्रसरित होता रहा है। यह कहने का अभिप्राय यह है कि हमारा देश धर्म प्रधान है और धर्म के बिना जीवन व्यर्थ है। इस संसार में आप लोग जहाँ तक देखेंगे यही पायेंगे कि संसार के सभी लोग चाहे वह ईसाई हों, मुस्लिम हों, सिख हों, जैन हों, बौध हो अपने अपने धर्म के प्रति समर्पित है। मतलब स्पष्ट है कि धर्म का महत्व अपरमित है। यहाँ पर मैं महाभारत में  भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कहे गये एक श्लोक का वर्णन करना आवश्यक समझता हूँ  ....  धर्मेण हन्यते व्यधि, धर्मेण हन्यते ग्रह: ।  धर्मेण हन्यते शत्रुर्यतोधर्मस्ततो जय: ।।  अर्थात धर्म में इतनी शक्ति है कि धर्म सभी व्याधियों का हरण कर आपको सुखमय जीवन प्रदान कर सकता है । धर्म इतना शक्तिशाली है कि वह सभी ग्रहों के दुष्प्रभावों को दूर कर सकता है । धर्म ही आपके सभी शत्रुओं का हरण कर उनपर आपको विजय दिला सकता है । अत: इसी प्रयास में आज आप लोगों को अपने शास्त्रों व ज्योतिषशास्त्र के सिद्धांतों पर आधारित एक अ...

बृहत्संहिता के अनुसार सूर्य और चंद्र के दश ग्रास

सुत्र:- (राहुचाराध्याय: श्लोक ४३) सव्यापसव्यलेहग्रसननिरोधावमर्दनारोहा: । आघ्रातं मध्यतमस्तमो∙न्त्य इति ते दश ग्रासा:॥ इस सुत्र के‍ अनुसार सूर्य एवं चंद्रमा के ग्रहण के समय उत्पन्न स्थिति से सव्य, अपसव्य, लेह, ग्रसन, निरोध, अवमर्दन, आरोह, आघ्रात, मध्यतम, तमोन्त्‍य ये सूर्य एवं चंद्र के दश ग्रास होते है ।    सूर्य ग्रहण हमेशा आमावस्या के दिन होता है। सूर्य एवं पृथ्वी के बिच में चंद्र आने पर सूर्य ग्रहण की स्थिती बनती है, तथा चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन होता है। सूर्य तथा चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आने पर चंद्र ग्रहण की स्थिती बनती है।    सभी देशों में प्राय: चंद्र ग्रहण एक रूप का तथा सूर्य ग्रहण अलग अलग आकृती का दिखता है । उसका कारण यह है कि बादलो की तरह अध:स्थित चंद्रमा पश्चिम की ओर से आकर रविबिंब को ढकता है । इसलिए प्रत्येक देश में सूर्य ग्रहण अलग अलग रूपो में दिखाई देता है। १ सव्यग्रास : ग्रहण के समय में सूर्य या चंद्र से सव्य (दक्षिण भाग) में होकर राहु गमन करे तो संसार हर्षित, भय रहित और जल से पूर्ण होता है । संसार में सूख, शांती होती है । २ अपसव्य : यदि राहु ...

सूर्य अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र संस्कृत हिन्दी अनुवाद

सूर्य अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र संस्कृत हिन्दी अनुवाद 〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰 ॐ विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव। यद् भद्रं तन्न आ सुव।। (ऋग्वेद ५।८२।५) समस्त संसार को उत्पन्न करने वाले (सृष्टि-पालन-संहार करने वाले) विश्व में सर्वाधिक देदीप्यमान एवं जगत को शुभकर्मों में प्रवृत्त करने वाले हे परब्रह्मस्वरूप सवितादेव! आप हमारे सभी आध्यात्मिक, आधिदैविक व आधिभौतिक बुराइयों व पापों को हमसे दूर, बहुत दूर ले जाएं; किन्तु जो भला, कल्याण, मंगल व श्रेय है, उसे हमारे लिए–विश्व के सभी प्राणियों के लिए भली-भांति ले आवें (दें)।’ भुवन-भास्कर भगवान सूर्य!!!!!! भगवान सूर्य परमात्मा नारायण के साक्षात् प्रतीक हैं, इसलिए वे सूर्यनारायण कहलाते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी विभूतियों का वर्णन करते हुए कहा है–‘ज्योतिषां रविरंशुमान्’ अर्थात् मैं (परमब्रह्म परमात्मा) तेजोमय सूर्यरूप में भी प्रतिष्ठित हैं। सूर्य प्रत्यक्ष देव हैं, इस ब्रह्माण्ड के केन्द्र हैं–आकाश में देखे जाने वाले नक्षत्र, ग्रह और राशिमण्डल इन्हीं की आकर्षण शक्ति से टिके हुए हैं। सभी प्राणियों और उनके भले बुरे कर्मों को निहारने ...

सूर्य उपासना

भगवान सूर्यनारायण का  नित्य सूर्यपूजा कैसे करनी चहिऐ?? 〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰🌸〰〰 महातेज, मार्तण्ड, मनोहर, महारोगहर। जयति सूर्यनारायण, जय जय सर्व सुखाकर।। (पद-रत्नाकर) भगवान सूर्य साक्षात् परमात्मा का स्वरूप हैं। सूर्योपनिषद् में सूर्य को ब्रह्मा, विष्णु और रूद्र का स्वरूप माना गया है। माना जाता है कि उदयकालीन सूर्य ब्रह्मारूप में होते हैं, दोपहर में सूर्य विष्णुरूप में और संध्या के समय वे संसार का अंत करने वाले रूद्ररूप में होते हैं। नित्य सूर्योपासना की विधि : - संसार के अन्धकार को दूर करने व मनुष्य को कर्म करने को प्रेरित करने के लिए साक्षात् नारायणरूप भगवान सूर्य प्रतिदिन प्रात:काल इस भूमण्डल पर उदित होते हैं। अत: उनके स्वागत के लिए मनुष्य को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत होकर शुद्ध वस्त्र पहन कर तैयार हो जाना चाहिए। शास्त्रों में सूर्यपूजा सूर्योदय के समय की श्रेष्ठ बतायी गयी है, अत: सुबह जितनी जल्दी हो सके सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए अथवा सूर्योदय के समय सूर्य को नमस्कार करने से भी अत्यन्त शुभ फलों की प्राप्ति होती है। अर्घ्यजल तैयार करने की विधि,,,,,, एक तांबे के लोटे...

भगवान भास्कर

आज हम आपको भगवान भाष्कर के बारे में विस्तार से बतायेगें!!!!!• वैदिक और पौराणिक आख्यानों के अनुसार भगवान श्री सूर्य समस्त जीव-जगत के आत्मस्वरूप हैं। ये ही अखिल सृष्टि के आदि कारण हैं। इन्हीं से सब की उत्पत्ति हुई है। पौराणिक सन्दर्भ में सूर्यदेव की उत्पत्ति के अनेक प्रसंग प्राप्त होते हैं। यद्यपि उनमें वर्णित घटनाक्रमों में अन्तर है, किन्तु कई प्रसंग परस्पर मिलते-जुलते हैं। सर्वाधिक प्रचलित मान्यता के अनुसार भगवान सूर्य महर्षि कश्यप के पुत्र हैं। वे महर्षि कश्यप की पत्नी अदिति के गर्भ से उत्पन्न हुए। अदिति के पुत्र होने के कारण ही उनका एक नाम आदित्य हुआ। पैतृक नाम के आधार पर वे काश्यप प्रसिद्ध हुए। संक्षेप में यह कथा इस प्रकार है- एक बार दैत्य-दानवों ने मिलकर देवताओं को पराजित कर दिया। देवता घोर संकट में पड़कर इधर-उधर भटकने लगे। देव-माता अदिति इस हार से दु:खी होकर भगवान सूर्य की उपासना करने लगीं। भगवान सूर्य प्रसन्न होकर अदिति के समक्ष प्रकट हुए। उन्होंने अदिति से कहा- देवि! तुम चिन्ता का त्याग कर दो। मैं तुम्हारी इच्छा पूर्ण करूँगा तथा अपने हज़ारवें अंश से तुम्हारे उदर से प्रकट होकर ते...

आदित्य हृदय स्तोत्र हिन्दी अनुवाद सहित

आदित्य हृदय स्तोत्र हिन्दी अनुवाद सहित 〰️〰️🌸〰️〰️🌸🌸〰️〰️🌸〰️〰️ वाल्मीकि रामायण के अनुसार “आदित्य हृदय स्तोत्र” अगस्त्य ऋषि द्वारा भगवान् श्री राम को युद्ध में रावण पर विजय प्राप्ति हेतु दिया गया था. आदित्य हृदय स्तोत्र का नित्य पाठ जीवन के अनेक कष्टों का एकमात्र निवारण है. इसके नियमित पाठ से मानसिक कष्ट, हृदय रोग, तनाव, शत्रु कष्ट और असफलताओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है. इस स्तोत्र में सूर्य देव की निष्ठापूर्वक उपासना करते हुए उनसे विजयी मार्ग पर ले जाने का अनुरोध है. आदित्य हृदय स्तोत्र सभी प्रकार के पापों , कष्टों और शत्रुओं से मुक्ति कराने वाला, सर्व कल्याणकारी, आयु, उर्जा और प्रतिष्ठा बढाने वाला अति मंगलकारी विजय स्तोत्र है. विनियोग 〰️〰️〰️ ॐ अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य अगस्त्यऋषि: अनुष्टुप्छन्दः आदित्यह्रदयभूतो भगवान् ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्माविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः पूर्व पिठिता 〰️〰️〰️ ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम् ॥1॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् । उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस...

आदित्य हृदय स्तोत्र हिन्दी अनुवाद सहित

आदित्य हृदय स्तोत्र हिन्दी अनुवाद सहित 〰️〰️🌸〰️〰️🌸🌸〰️〰️🌸〰️〰️ वाल्मीकि रामायण के अनुसार “आदित्य हृदय स्तोत्र” अगस्त्य ऋषि द्वारा भगवान् श्री राम को युद्ध में रावण पर विजय प्राप्ति हेतु दिया गया था. आदित्य हृदय स्तोत्र का नित्य पाठ जीवन के अनेक कष्टों का एकमात्र निवारण है. इसके नियमित पाठ से मानसिक कष्ट, हृदय रोग, तनाव, शत्रु कष्ट और असफलताओं पर विजय प्राप्त की जा सकती है. इस स्तोत्र में सूर्य देव की निष्ठापूर्वक उपासना करते हुए उनसे विजयी मार्ग पर ले जाने का अनुरोध है. आदित्य हृदय स्तोत्र सभी प्रकार के पापों , कष्टों और शत्रुओं से मुक्ति कराने वाला, सर्व कल्याणकारी, आयु, उर्जा और प्रतिष्ठा बढाने वाला अति मंगलकारी विजय स्तोत्र है. विनियोग 〰️〰️〰️ ॐ अस्य आदित्यह्रदय स्तोत्रस्य अगस्त्यऋषि: अनुष्टुप्छन्दः आदित्यह्रदयभूतो भगवान् ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्माविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः पूर्व पिठिता 〰️〰️〰️ ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम् ॥1॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् । उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस...

सूर्य देव (आदित्य) के 12 स्वरूप, जानिए इनके नाम और काम

सूर्य देव (आदित्य) के 12 स्वरूप, जानिए इनके नाम और काम  〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ हिंदू धर्म में प्रमुख रूप से 5 देवता माने गए हैं। सूर्यदेव उनमें से एक हैं। भविष्यपुराण में सूर्यदेव को ही परब्रह्म यानी जगत की सृष्टि, पालन और संहार शक्तियों का स्वामी माना गया है। भगवान सूर्य जिन्हें आदित्य के नाम से भी जाना जाता है, के 12 स्वरूप माने जाते है, जिनके द्वारा ये उपरोक्त तीनो काम सम्पूर्ण करते है।आइए जानते है क्या है इन 12 स्वरूप के नाम और क्या है इनका काम। ✡ इन्द्र :- भगवान सूर्य (आदित्य) के प्रथम स्वरुप का नाम इंद्र है। यह देवाधिपति इन्द्र को दर्शाता है। इनकी शक्ति असीम हैं। दैत्य और दानव रूप दुष्ट शक्तियों का नाश और देवों की रक्षा का भार इन्हीं पर है। ✡ धाता :- भगवान सूर्य (आदित्य) के दूसरे स्वरुप का नाम धाता है। जिन्हें श्री विग्रह के रूप में जाना जाता है। यह प्रजापति के रूप में जाने जाते हैं जन समुदाय की सृष्टि में इन्हीं का योगदान है, सामाजिक नियमों का पालन ध्यान इनका कर्तव्य रहता है। इन्हें सृष्टि कर्ता भी कहा जाता है। ✡ पर्जन्य :- भगवान सूर्य (आदित्य) के तीसरे स्वरुप का...

*ज्योतिषनुसार सूर्य अर्घ्य के आर्थिक एवं शारीरिक लाभ*

*ज्योतिषनुसार सूर्य अर्घ्य के आर्थिक एवं शारीरिक लाभ* 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ भारतीय शास्त्रों के अनुसाए सूर्य देव को जल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है. जी हां अक्सर आप अपनी समस्या लेकर जब किसी पंडित के पास जाते है, तो वो सबसे पहले सूर्य को अर्घ देने का उपाय ही सुझाते है. वही अगर किसी व्यक्ति की कुंडली मे सूर्य ग्रह मजबूत हो तो यह माना जाता है, कि वह व्यक्ति काफी गुणवान होता है. साथ ही समाज मे उसका बहुत मान सम्मान भी होता है. इसके इलावा वह बहुत प्रतिष्ठित भी होता है. ऐसे मे कुंडली मे सूर्य ग्रह को मजबूत रखना बेहद जरुरी है। वैसे महाभारत काल से ऐसा माना जाता है, कि कर्ण नियमित रूप से सूर्य देव की पूजा करते थे और सूर्य को जल का अर्घ भी देते थे. इसके इलावा सूर्य देव की पूजा के बारे मे भगवान् राम की कथा मे भी यह लिखा गया है, कि भगवान् राम हर रोज सूर्य देव की पूजा करते थे और अर्घ देते थे. वैसे कलयुग मे भी ऐसे बहुत से लोग है जो सूर्य देव को जल अर्पित करते है और उनकी पूजा करते है. गौरतलब है, कि सूर्य देव को अगर पूरी विधि के साथ जल चढ़ाया जाये तो इसके परिणाम और भी अच्छे होते है। यदि हम सूर्य द...

सूर्य

वैदिक ज्योतिष में सूर्य की सम्पूर्ण व्याख्या  〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ मधुपिण्ड गलदृक सुर्यश्चतुरस्त्र:। पित्त प्रकृतिको श्रीमान्नपुमानल्पकचो द्विज।। नवग्रहों में सूर्य को राजा की उपाधि प्राप्त है। अर्थात सूर्य एक शहद के समान पीले नेत्र युक्त, चौकोर शरीर, पित्त प्रकृति थोड़े बाल व स्वच्छ कांति वाला पुरुष ग्रह है। सूर्य के अन्य नाम रवि, अरुण, अर्यमा, दिनमणि, दिनेश, मिहिर, नभेश्वर, आदित्य, मार्तण्ड, दिवाकर, हेली, पूषा, तपन, प्रभाकर, अर्क, चित्ररथ, व भास्कर है। सूर्य को अंग्रेजी में सन, अरबी में शम्स व फारसी में खुरशेद कहते है। सौरमंडल का सूर्य प्रमुख ग्रह होने के साथ अन्य ग्रहों का केंद्र भी है इसलिये अन्य सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा देते है। श्रीमद्भागवत के आधार पर पृथ्वी तथा स्वर्ग के मध्य जिस स्थान पर ब्रह्मांड का केंद्र है वहीं सूर्य स्थिति है। पौराणिक कथा के अनुसार दक्ष प्रजापति की अदिति व दिति दो कन्याए थी इनदोनो का विवाह ऋषि कश्यप से हुआ था। दिति के गर्भ से दैत्य व अदिति के गर्भ से सूर्य व अन्य देवताओं का जन्म हुआ इसलिये सूर्य का एक नाम आदित्य भी है सूर्य की पत्नी का नाम संज...