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नारायण कवच

श्री नारायण कवच  〰️〰️🌼🌼〰️〰️ ।।राजोवाच।। 〰️〰️〰️〰️ यया गुप्तः सहस्त्राक्षः सवाहान् रिपुसैनिकान्। क्रीडन्निव विनिर्जित्य त्रिलोक्या बुभुजे श्रियम्।।1 भगवंस्तन्ममाख्याहि वर्म नारायणात्मकम्। यथाssततायिनः शत्रून् येन गुप्तोsजयन्मृधे।।2 राजा परिक्षित ने पूछाः भगवन् ! देवराज इंद्र ने जिससे सुरक्षित होकर शत्रुओं की चतुरङ्गिणी सेना को खेल-खेल में अनायास ही जीतकर त्रिलोकी की राज लक्ष्मी का उपभोग किया, आप उस नारायण कवच को सुनाइये और यह भी बतलाईये कि उन्होंने उससे सुरक्षित होकर रणभूमि में किस प्रकार आक्रमणकारी शत्रुओं पर विजय प्राप्त की ।।1-2 ।।श्रीशुक उवाच।। 〰️〰️〰️〰️〰️ वृतः पुरोहितोस्त्वाष्ट्रो महेन्द्रायानुपृच्छते। नारायणाख्यं वर्माह तदिहैकमनाः शृणु।।3 श्रीशुकदेवजी ने कहाः परीक्षित् ! जब देवताओं ने विश्वरूप को पुरोहित बना लिया, तब देवराज इन्द्र के प्रश्न करने पर विश्वरूप ने नारायण कवच का उपदेश दिया तुम एकाग्रचित्त से उसका श्रवण करो ।।3 विश्वरूप उवाचधौताङ्घ्रिपाणिराचम्य सपवित्र उदङ् मुखः। कृतस्वाङ्गकरन्यासो मन्त्राभ्यां वाग्यतः शुचिः।।4 नारायणमयं वर्म संनह्येद् भय आगते। पादयोर्जानुनोरूर्वोरू...

श्री सुदर्शन महा कवच

नमस्ते मित्रों , समस्त जगत विषाणु ग्रस्त होने के कारण व्यक्ति भय के अधीन हो जाता हैं , विषाणु भी एक बाधित वासनिक आत्मा ही हैं । सूक्ष्म विषाणु की ओरा एक मजबूत आदमी की ओरा को भी भेद देती हैं । इसलिए व्यक्ति के त्वचा के ऊपर एक दैवीय ऊर्जा होनी चाहिए । इसको ध्यान में रखकर नीचे 👇 जो कवच दिया है , उसे रोजाना कुछ दिन पढ़िए।  शरीर का तेज और रक्षा के लिए काफी मजबूत कवच हैं ।  ।। श्री सुदर्शन महकवचं ।।  विनियोग : ॐ अस्य श्री सुदर्शन कवच माला मंत्रस्य श्री लक्ष्मी नृसिंह: परमात्मा देवता क्षां बीजं ह्रीं शक्ति मम कार्य सिध्यर्थे जपे विनयोग:। करन्यास हृदयादि न्यास:  ॐ क्षां अन्गुष्ठाभ्याम नम: हृदयाय नम: ॐ ह्रीं तर्जनीभ्याम नम: शिरसे स्वाहा ॐ श्रीं मध्यमाभ्याम नम: शिखाए वषट ॐ सहस्रार अनामिकभ्याम नम: कवचाय हुम  ॐ हुं फट कनिष्ठिकाभ्याम नम: नेत्रत्रयाय वौषट ॐ स्वाहा करतल-कर प्र्ष्ठाभ्याम नम: अस्त्राय फट ध्यानं :- उपसमाहे नृसिंह आख्यम ब्रह्म वेदांत गोचरम। भूयो-लालित संसाराच्चेद हेतुं जगत गुरुम।।  पंचोपचार पूजनं :  लं पृथ्वी तत्वात्मकम गंधंम समर्पयामि हं आकाश तत्वात्मकम...

पित्र कवच

कृणुष्व पाजः प्रसितिम् न पृथ्वीम् याही राजेव अमवान् इभेन।   तृष्वीम् अनु प्रसितिम् द्रूणानो अस्ता असि विध्य रक्षसः तपिष्ठैः॥   तव भ्रमासऽ आशुया पतन्त्यनु स्पृश धृषता शोशुचानः।   तपूंष्यग्ने जुह्वा पतंगान् सन्दितो विसृज विष्व-गुल्काः॥   प्रति स्पशो विसृज तूर्णितमो भवा पायु-र्विशोऽ अस्या अदब्धः।   यो ना दूरेऽ अघशंसो योऽ अन्त्यग्ने माकिष्टे व्यथिरा दधर्षीत्॥   उदग्ने तिष्ठ प्रत्या-तनुष्व न्यमित्रान् ऽओषतात् तिग्महेते।   यो नोऽ अरातिम् समिधान चक्रे नीचा तं धक्ष्यत सं न शुष्कम्॥   ऊर्ध्वो भव प्रति विध्याधि अस्मत् आविः कृणुष्व दैव्यान्यग्ने।   अव स्थिरा तनुहि यातु-जूनाम् जामिम् अजामिम् प्रमृणीहि शत्रून्।   अग्नेष्ट्वा तेजसा सादयामि॥

कामकला त्रिलोक्यमोहनकवचः

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●     ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों------- .कामकला त्रिलोक्यमोहनकवचः अस्य श्री त्रैलोकयमोहन रहस्य कवचस्य । त्रिपुरारि ऋषिः – विराट् छन्दः – भगवति कामकलाकाली देवता । फ्रें बीजं – योगिनी शक्तिः- क्लीं कीलकं – डाकिनि तत्त्वं भ्गावती श्री कामकलाकाली अनुग्रह प्रसाद सिध्यर्ते जपे विनियोगः॥ — ॐ ऐं श्रीं क्लीं शिरः पातु फ्रें ह्रीं छ्रीं मदनातुरा। स्त्रीं ह्रूं क्षौं ह्रीं लं ललाटं पातु ख्फ्रें क्रौं करालिनी॥ १ आं हौं फ्रों क्षूँ मुखं पातु क्लूं ड्रं थ्रौं चन्ण्डनायिका। हूं त्रैं च्लूं मौः पातु दृशौ प्रीं ध्रीं क्ष्रीं जगदाम्बिका॥ २ क्रूं ख्रूं घ्रीं च्लीं पातु कर्णौ ज्रं प्लैं रुः सौं सुरेश्वरी। गं प्रां ध्रीं थ्रीं हनू पातु अं आं इं ईं श्मशानिनी॥ ३ जूं डुं ऐं औं भ्रुवौ पातु कं खं गं घं प्रमाथिनी। चं छं जं झं पातु नासां टं ठं डं ढं भगाकुला॥ ४ तं थं दं धं पात्वधरमोष्ठं पं फं रतिप्रिया। बं भं यं रं पातु दन्तान् लं वं शं सं चं कालिका॥ ५ हं क्षं क्षं हं पातु जिह्वां सं शं वं लं रताकुला। वं यं भं वं चं चिबुकं पातु फं पं मह...

अमोघ शिवकवच

*अमोघ शिव कवच प्रयोग* सर्व साधारण व समस्त आस्तिक भक्तो के लाभार्थ अति प्राचीन सिद्धीप्रद अमोघ शिव कवच प्रयोग दे रहा हूँ ।इसके शुद्ध सत्य अनुष्ठान से भयंकर से भयंकर विपत्ति से छुटकारा मिल जाता है और भगवान आशुतोष की कृपा हो जाती है। *अथ विनियोग:*   अस्य श्री शिव कवच स्त्रोत्र मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषि:, अनुष्टुप छंद:, श्री सदाशिव रुद्रो देवता, ह्रीं शक्ति:, रं कीलकम, श्रीं ह्रीं क्लीं बीजं, श्री सदाशिव प्रीत्यर्थे शिवकवच स्त्रोत्र जपे विनियोग:। *अथ न्यास:*  (पहले सभी मंत्रो को बोलकर क्रम से करन्यास करे। तदुपरांत इन्ही मंत्रो से अंगन्यास करे।)  *करन्यास*   ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ  ह्रां सर्वशक्तिधाम्ने इशानात्मने अन्गुष्ठाभ्याम नम:। ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ  नं रिं नित्यतृप्तिधाम्ने तत्पुरुषातमने तर्जनीभ्याम नम:। ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ  मं रूं अनादिशक्तिधाम्ने अधोरात्मने मध्यमाभ्याम नम:। ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ शिं रैं स्वतंत्रशक्तिधाम्ने वामदेवात्मने अनामिकाभ्याम नम:।  ॐ नमो भगवते ज्वलज्वालामालिने ॐ वां रौं अलुप्तशक्तिधाम्ने स...

बगलामुखी साधना

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●     ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों------- बगलामुखी साधना बगल स्तोत्र , कवच एवम् अष्टोत्तरशतनाम स्तोत...