क्षौर कर्म/ तैल भंग
●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों------- लेख पुनरबृत्ति💐 *क्षौर कर्म / तैल भंग* क्षौर कर्म : शुभाशुभ दिन गर्गादि आचार्यों के अनुसार रविवार, मंगलवार एवं शनिवार को क्षौर कर्म (हजामत) कर्म करवाने से आयु का क्षय होता है। सोमवार, बुधवार, वीरवार और शुक्रवार को क्षौर कर्म करवाना शुभ होता है। मतांतर से एक पुत्र संतान वाले गृहस्थी को सोमवार के दिन तथा विद्या एवं धनाकांक्षी गृहस्थी को वीरवार के दिन क्षौर नहीं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त पर्व वाले दिन जन्मदिन, चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी आदि रिक्ता तिथियों में व्रत के दिन, अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति, श्राद्ध के दिन, भद्रा और व्यातिपात योग में तथा भोजन करने के बाद, देश-प्रदेश जाने के समय में शुभाकांक्षी क्षौर कर्म न कराएं। मालिश करना बहुत से लोग नहाने से पूर्व शरीर की मालिश करते हैं। शास्त्रों के अनुसार- तैलाभ्यांगे रवौ ताप: सोमे शोभा कुजे मृति:। बुधेधनं गुरौ हानि: शुझे दु:ख शनौ सुखम्॥ अर्थ- रविवार को तेल मालिश से ताप यानी गर्मी संबंधी रोग, सोमवार को शरीर क...