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विवाह के सूत्रधार ग्रह: गुरु, शुक्र व मंगल

विवाह के सूत्रधार ग्रह: गुरु, शुक्र व मंगल  〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 जब किसी व्यक्ति की कुण्डली से दांपत्य का विचार किया जाता है, तो उसके लिये गुरु, शुक्र व मंगल का विश्लेषण किया जाता है. इन तीनों ग्रहों कि स्थिति को समझने के बाद ही व्यक्ति के दांपत्य जीवन के विषय में कुछ कहना सही रहता है. आईये यहां हम दाम्पत्य जीवन से जुडे तीन मुख्य ग्रहों को समझने का प्रयास करते है. 1👉 गुरु की वैवाहिक जीवन में भूमिका 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰  सुखी दाम्पत्य जीवन के लिये भावी वर-वधू की कुण्डली में गुरु पाप प्रभाव से मुक्त होना चाहिए. गुरु की शुभ दृ्ष्टि सप्तम भाव पर हों तो वैवाहिक जीवन में परेशानियों व दिक्कतों के बाद भो अलगाव की स्थिति नहीं बनती है. अर्थात गुरु की शुभता वर-वधू का साथ व उसके विवाह को  बनाये रखती है. गुरु दाम्पत्य जीवन की बाधाओं को दूर करने के साथ-साथ, संतान का कारक ग्रह भी है. अगर कुण्डली में गुरु पीडित हों तो सर्वप्रथम तो विवाह में विलम्ब होगा, तथा उसके बाद संतान प्राप्ति में भी परेशानियां आती है. सुखी दाम्पत्य जीवन के लिये संतान का समय पर होना आवश्यक समझा जाता है. विवाह के बा...

मंगल के शुभ-अशुभ योग और उपाय

मंगल के शुभ-अशुभ योग और उपाय 〰️〰️🌼〰️🌼🌼〰️🌼〰️〰️ जन्म कुंडली मे मंगल के योग जीवन की दशा बदलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है। कुंडली में मंगल की अच्छी दशा बेहद कामयाब बनाती है. वहीं इस ग्रह की बुरी दशा इंसान से सब कुछ छीन भी सकती है. मंगल के बहुत से शुभ और अशुभ योग हैं। मंगल का पहला अशुभ योग  〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ 👉 किसी कुंडली में मंगल और राहु एक साथ हों तो अंगारक योग बनता है. 👉अक्सर यह योग बड़ी दुर्घटना का कारण बनता है. 👉 इसके चलते लोगों को सर्जरी और रक्त से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है. 👉 अंगारक योग इंसान का स्वभाव बहुत क्रूर और नकारात्मक बना देता है. 👉 इस योग की वजह से परिवार के साथ रिश्ते बिगड़ने लगते हैं. मंगल का दूसरा अशुभ योग  〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ अंगारक योग के बाद मंगल का दूसरा अशुभ योग है मंगल दोष. यह इंसान के व्यक्तित्व और रिश्तों को नाजुक बना देता है. 👉 कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें स्थान में मंगल हो तो मंगलदोष का योग बनता है. 👉 इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति को मांगलिक कहते हैं. 👉 कुंडली की यह स्थिति विवाह संबंधों के लिए बहुत ...

गंड मूल दोष {मूल शांति क्यों कराये}

गंड मूल दोष {मूल शांति क्यों कराये} जातक की जन्म कुंडली में चन्द्रमा, रेवती, अश्विनी, श्लेषा, मघा, ज्येष्ठा तथा मूल नक्षत्रों में से किसी एक नक्षत्र में स्थित हो तो कुंडली धार...

पञ्चाङ्ग की उपयोगिता

पञ्चाङ्ग की उपयोगिता ~~~~~~~~~~~ भारतीय पंचांग का आधार विक्रम संवत है जिसका सम्बंध राजा विक्रमादित्य के शासन काल से है। ये कैलेंडर विक्रमादित्य के शासनकाल में जारी हुआ था। इसी क...