गीतामें भगवान् के चालीस सम्बोधनात्मक नाम और उनके अर्थ*
🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 *गीतामें भगवान् के चालीस सम्बोधनात्मक नाम और उनके अर्थ* *[श्रीमद्भगवद्गीतामें कुल २४९ सम्बोधनात्मक पद हैं, जिनमें भगवान् श्रीकृष्णके लिये ७६, अर्जुनके लिये १६२, सञ्जयके लिये १, धृतराष्ट्रके लिये ८ और द्रोणाचार्यके लिये २ हैं।]* 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 १. अच्युत = अपने स्वरूपसे कभी च्युत न होनेवाले अर्थात् अपनी महिमामें नित्य स्थित। (१। २१; ११। ४२; १८ । ७३) = ३ २. अनन्त = सीमारहित। (११ । ३७) = १ ३. अनन्तरूप = अनन्त रूपवाले। (११। ३८)=१ ४. अनन्तवीर्य= अनन्त सामर्थ्यवाले। (११ । ४०) = १ ५. अप्रतिमप्रभाव= अतुलनीय प्रभाववाले। (११ । ४३) = १ ६. अरिसूदन= शत्रुओंका संहार करनेवाले! (२। ४) = १ ७. कमलपत्राक्ष= कमलपत्रके सदृश नेत्रोंवाले। (११। २) = १ ८. कृष्ण= श्रीकृष्ण (श्यामसुन्दर) अर्थात् सम्पूर्ण प्राणियोंको अपनी तरफ खींचनेवाले। (१। २८,३२,४१; ५। १; ६.। ३४, ३७, ३९; ११। ४१; १७।१) = ९ ९. केशव = क = ब्रह्मा, अ = विष्णु, ईश = शंकर—ये तीनों जिनके व = वपु अर्थात् स्वरूप हैं, वे केशव हैं। (१। ३१; २। ५४; ३। १; १० । १४) = ४ १०. केशिनिषूदन = केशि नामक दैत्यको मारनेवाले अर्थात् भक्तोंके सम्पूर्ण वि...