संदेश

शिव चर्चा लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शिव और शंकर के स्वरूप भेद

शिव और शंकर के स्वरूप भेद       निराकार ब्रह्म का स्वरूप है शिव , शाश्वत ओर अनंत है । एक से अनेक बनू की इच्छामात्र से उनकी महामाया ( महाकालि ) प्रकट हुई और पंचतत्व जल , वायु , अग्नि , भूमि और आकाशतत्व का सर्जन हुवा । जलतत्व से शक्ति ( देवी ) , वायुतत्व से नारायण ( विष्णु ), अग्नितत्वसे सूर्य ( आदित्य ), भूमितत्व से महागणपति ( ब्रह्मा ) और आकाशतत्व से रुद्र ( शंकर ) प्रकट हुवे । चौदह ब्रह्मांड जल , स्थल , वायु वनस्पति के साथ अनेक जीव सृष्टि की रचना हुई । देव , दानव , यक्ष , किन्नर , गांधर्व , चारण , सर्प , वानर , मानव और जलचर , खेचर , भूचर जीव सृष्टि की रचना हुई । सृजन ज्ञान ( ब्रह्मा ) सृष्टि का संचालन ( विष्णु ) सृष्टिलय (शंकर ) प्रकृति पोषण ( सूर्य ) और आसुरी दमन ( देवी ) का कार्यभार है ।     सनातन धर्म की विविध पूजा उपासना ओर विविध संप्रदायों के अपने इष्ट की प्रसंशा ग्रंथोंसे मूल सत्य को अलिप्त कर दिया । आजके आधुनिक युगमे समय अभाव और साम्प्रदायिक प्रचारों से नई पीढ़ी भ्रमित है । राम और कृष्ण भी शिव की उपासना करते थे वो तो रामायण और कृष्णलीला के ग्रंथोके आ...

पारद शिवलिंग

*💥पारदशिवलिंग पूजन का महत्त्व💥* वैदिक रीतियों में, पूजन विधि में, समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति में पारद से बने शिवलिंग एवं अन्य आकृतियों का विशेष महत्त्व होता है। पारद जिसे अंग्रेजी में एलम (Alum) भी कहते हैं , एक तरल पदार्थ होता है और इसे ठोस रूप में लाने के लिए विभिन्न अन्य धातुओं जैसे कि स्वर्ण, रजत, ताम्र सहित विभिन्न जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है। इसे बहुत उच्च तापमान पर पिघला कर स्वर्ण और ताम्र के साथ मिला कर, फिर उन्हें पिघला कर आकार दिया जाता है। पारद को भगवान् शिव का स्वरूप माना गया है और ब्रह्माण्ड को जन्म देने वाले उनके वीर्य का प्रतीक भी इसे माना जाता है। धातुओं में अगर पारद को शिव का स्वरूप माना गया है तो ताम्र को माँ पार्वती का स्वरूप। इन दोनों के समन्वय से शिव और शक्ति का सशक्त रूप उभर कर सामने आ जाता है। ठोस पारद के साथ ताम्र को जब उच्च तापमान पर गर्म करते हैं तो ताम्र का रंग स्वर्णमय हो जाता है। इसीलिए ऐसे शिवलिंग को "सुवर्ण रसलिंग" भी कहते हैं। पारद के इस लिंग की महिमा का वर्णन कई प्राचीन ग्रंथों में जैसे कि रूद्र संहिता, पारद संहिता, रस्मर्तण्ड ग्रन्थ,...

भगवान शिव के 35 रहस्य

Aachary Rudreshwaran: ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  *#भगवान_शिव के  "35" रहस्य!!!!!!!!* भगवान शिव अर्थात पार्वती के पति शंकर जिन्हें महादेव, भोलेनाथ, आदिनाथ आदि कहा जाता है। *🔱1. आदिनाथ शिव : -* सर्वप्रथम शिव ने ही धरती पर जीवन के प्रचार-प्रसार का प्रयास किया इसलिए उन्हें 'आदिदेव' भी कहा जाता है। 'आदि' का अर्थ प्रारंभ। आदिनाथ होने के कारण उनका एक नाम 'आदिश' भी है। *🔱2. शिव के अस्त्र-शस्त्र : -* शिव का धनुष पिनाक, चक्र भवरेंदु और सुदर्शन, अस्त्र पाशुपतास्त्र और शस्त्र त्रिशूल है। उक्त सभी का उन्होंने ही निर्माण किया था। *🔱3. भगवान शिव का नाग : -* शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है। वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है। *🔱4. शिव की अर्द्धांगिनी : -* शिव की पहली पत्नी सती ने ही अगले जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया और वही उमा, उर्मि, काली कही गई हैं। *🔱5. शिव के पुत्र : -* शिव के प्रमुख 6 पुत्र हैं- गणेश, कार्तिकेय, सुकेश, जलंधर, अयप्पा और भूमा। सभी के जन्म की ...

प्राचीन कैलाश रहस्य

Aachary Rudreshwaran: ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  प्राचीन कैलास मंदिर का रहस्य जानकर आआश्चर्यचकित रह जाओगे!!!!! आपने अनेको रहस्यमयी स्थानों के बारे में सुना होगा, कुछ जगहे भूतिया होने से मशहूर है तो कुछ पुरातन होने की वजह से मशहूर, हमारा देश ऐसे अनेक रहस्यों से भरा हुवा है,आज मैं आपको एक ऐसे रहस्यमयी मंदिर के बारे में बताने जा रहा हु, जो प्राचीन होने के साथ साथ रहस्यमयी भी है। कुछ वैज्ञानिको का यह भी मानना है की इस मंदिर का निर्माण एलियन ने किया था, लेकिन इसकी सच्चाई क्या है ये कोई नहीं जान पाया है, उस मंदिर का नाम है, कैलास मंदिर, ये मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित है, इस स्थान पर अनेको गुफाएं है, उनमे से कुछ बौद्ध गुफाएं है, कुछ जैन गुफाएं है और कुछ हिन्दू गुफाएं है एस कुल ३४ गुफाएं मौजूद है। इस स्थान को विश्व में एल्लोरा केव्स के नाम से जाना जाता है, इन्ही गुफाओ में से १६ वीं गुफा में स्थित है कैलास मंदिर, सुन्दर कलाकृतियों का ये नमूना है, इस मंदिर को हर साल दुनिया भर से लोग देखन...