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मंत्र योग

शास्त्रों के अनुसार अनेक प्रकार के योग बताए गये हैं, इन सभी योग की साधना सबसे सरल और सुगम है। मंत्र योग की साधना कोई श्रद्धा पूर्वक व निर्भयता पूर्वक कर सकता है। श्रद्धापूर्वक की गयी साधना से शीघ्र ही सिद्धि प्राप्त कर अभीष्ट की प्राप्ति की जा सकती है। अपने लक्ष्य को मंत्र योग द्वारा शीघ्रता से प्राप्त किया जा सकता है। वर्तमान समय में सम्पूर्ण संसार में लगभग 90 प्रतिषत साधक मंत्र योग के अनुयायी है अत: जिन साधकों को अन्य योग साधना कठिन प्रतीत हो उन साधकों को मंत्र योग की साधना से अभीष्ट सिद्धि मिल सकती हैं। सामान्य व्यक्ति साधना आरम्भ करना चाहते है उनके लिए साधनपाद में महर्षि पतंजलि ने सर्वप्रथम क्रियायोग को बतलाते है-  महर्षि पतंजलि की दृष्टि में क्रियायोग वह है कि जिन क्रियाओं से योग सधे, और यह क्रियायोग समाधि की सिद्धि देने वाले है। मंत्रयोग की अवधारणा वह शक्ति जो मन को बन्धन से मुक्त कर दे वही मंत्र योग है।” मंत्र को सामान्य अर्थ ध्वनि कम्पन से लिया जाता है। मंत्र विज्ञान ध्वनि के विद्युत रुपान्तर की साधना है, अनोखी विधि है।        ‘मंत्रजपान्मनोलयो मंत्रयोग:...

देह रक्षा

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  देह रक्षा शाबर मंत्र  ~~~~~ सिद्ध करने की विधिः निम्न मन्त्रों को किसी भी शनिवार या मंगलवार को हनुमान जी विषयक नियमो का पालन करके 3 माला प्रतिदिन  11 दिन तक करें। आवश्यकः माला जप रुद्राक्ष की माला से करें। आसन लाल, तेल का दिया, लाल वस्त्र, सिंदूर का टीका, एवं हनुमान जी को दो लड्डू चढ़ाएं उपयोग: इनको सिद्ध कर ले फिर 9 या 11 बार पढकर  क) अपने शरीर पर फूंक मारे व दोनों हाथो को पुरे शरीर पर फेरें ! इससे आपकी रक्षा होगी कोई भी शक्ति आप को नुकसान नही पहुंचाएगी। ख) आधा गिलास जल में 11 बार फूंक मार कर जल को पीये, पूर्ण रुप से सुरक्षा शरीर की बनी रहेगी। ( मंत्र को बोलकर गिलास में फूंक लगाएं यह प्रक्रिया 11 बार अपनाएं इस तरह जल अभिमंत्रित हो जाएगा) मंत्रः ~~ १) ।। उत्तर बांधो, दक्खिन बांधो, बांधो मरी मसानी , डायन भूत के गुण बांधो, बांधो कुल परिवार , नाटक बांधो, चाटक बांधो, बांधो भुइयां बैताल ! नजर गुजर देह बांधो, राम दुहाई फेरों वाचा ,शब्द सांचा पिंड काचा, फुरो ...

ॐ_पूर्णमद_पूर्णमिदम्

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।                            *१* अदः --- वह कारण ब्रह्म सत् (नामरूप के विभाग के अयोग्य  अर्थात् सूक्ष्मचिदचित् विशिष्ट ब्रह्म) #पूर्ण हैं।  #इदम्:---- यह दृश्यमान जगत् (कार्यरूपब्रह्म /स्थूल चिदचिद्विशिष्ट ब्रह्म    पूर्णम = पूर्ण हैं। पूर्णात् :---पूर्ण कारण से  पूर्णम् :--- पूर्ण कार्य  उदच्यते:---- उत्पन्न (प्रगट) होता है। पूर्णस्य:---पूर्ण कारण (ब्रह्म )के पूर्णम्आदाय :---पूर्ण कार्य को लीन करके। पूर्णमेव:----पूर्ण ही। अवशिष्यते :----शेष रहता है।                      *२.* #अदः ---त्रिपाद्विभूति में विद्यमान पर वासुदेव परब्रह्म । #पूर्णम् ---पूर्ण हैं। #इदम्  :----हृदयस्थ अंतर्यामी । #पूर्णम् :-- पूर्ण हैं। #पूर्णात् :-----पूर्ण परमात्मासे              #पूर्णम्  :---पूर्णव्यूह (वासुदेव , संकर्षण ,प्रद्...

हनुमान जी के मंत्र

*हनुमान जी के कुछ चमत्कारी सिद्ध मंत्र* *जो साधक पूर्ण श्रद्धा, आस्था एवं लग्न के साथ श्री हनुमान जी का जप, पूजा-पठन आदि कुछ भी करते हैं उनको समस्त सुखों की प्राप्ति होती ही होती है, इसमें लेश मात्र भी संशय नहीं है। हनुमत साधना से लाभ पाये असंख्य लोग इसके साक्षात् उदाहरण हैं। वाचिक, उपांशु अथवा मानसिक कोई भी जप इच्छापूर्ति के लिए कर रहे हैं तो उसके लिए ब्रह्मचर्य, सद्विचार अत्यन्त आवश्यक हैं। मंत्र जप के साथ यदि नैवेद्य, पुष्प तथा सिंदूर के चोले से देव को प्रसन्न करने का यत्न करते हैं तो फल की प्राप्ति बहुत ही शीघ्रता से मिलती है। हनुमान जी से सम्बन्धित बीज, मंत्र, चालीसा, बाहुक, बाण, साठिका आदि कुछ भी कर रहे हैं तो उसके बाद एक माला सीता राम की अवश्य जप लिया करें। मंत्र जप के बाद उस मंत्र का दशांश संख्या में हवन कर लेने से मंत्र सिद्ध हो जाता है। यदि मंत्र जप, दशांश हवन, हवन सामग्री आदि की पूर्ण विधि में जाना है तो उसके विस्तृत ज्ञान के लिए अन्य शास्वत ग्रंथों का अध्ययन मनन करना भी आवश्यक हो जाता है। उचित परामर्श यही है कि जप से पूर्व किसी बौद्धिक व्यक्ति से विषयक चर्चा एवं ज्ञान अवश्य...

दुर्गा सप्तशती पाठ विधि

श्री दुर्गा सप्तशती श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ करने का अलग विधान है। कुछ अध्यायों में उच्च स्वर, कुछ में मंद और कुछ में शांत मुद्रा में बैठकर पाठ करना श्रेष्ठ माना गया है। जैसे कीलक मंत्र को शांत मुद्रा में बैठकर मानसिक पाठ करना श्रेष्ठ है। देवी कवच उच्च स्वर में और श्रीअर्गला स्तोत्र का प्रारम्भ उच्च स्वर और समापन शांत मुद्रा से करना चाहिए। देवी भगवती के कुछ मंत्र यंत्र, मंत्र और तंत्र क्रिया के हैं। संपूर्ण दुर्गा सप्तशती स्वर विज्ञान का एक हिस्सा है। वाकार विधि:  प्रथम दिन एक पाठ प्रथम अध्याय, दूसरे दिन दो पाठ द्वितीय, तृतीय अध्याय, तीसरे दिन एक पाठ चतुर्थ अध्याय, चौथे दिन चार पाठ पंचम, षष्ठ, सप्तम व अष्टम अध्याय, पांचवें दिन दो अध्यायों का पाठ नवम, दशम अध्याय, छठे दिन ग्यारहवां अध्याय, सातवें दिन दो पाठ द्वादश एवं त्रयोदश अध्याय करके एक आवृति सप्तशती की होती है।  संपुट पाठ विधि:  किसी विशेष प्रयोजन हेतु विशेष मंत्र से एक बार ऊपर तथा एक नीचे बांधना उदाहरण हेतु संपुट मंत्र मूलमंत्र-1, संपुट मंत्र फिर मूलमंत्र अंत में पुनः संपुट मंत्र आदि इस विधि में समय अधिक लगता है। ले...

सर्प भय नाश के लिए उपाय

सर्प से निर्भय रहने और भगाने का मंत्र 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 आपको आश्चर्य होगा, यह जानकर कि साँप सुन नहीं सकता, क्योंकि इसके कान ही नहीं होते हैं, बीन द्वारा सपेरा हमेंभिरम में रखने हेतु साँप के आगो बीन बजाता है ! आपने यह भी देखा होगा, कि सपेरा बीन बजाने के दौरान साँप को बीच-बीच में हाथ मारकर साँप को क्रोध दिलाता है, ताँकि साँप अपना फन उठाकर रखे, बस सपे की यही चाल कामयाब हो जाती है तथा आसपास खड़े व्यक्ति समझते हैं कि साँप बीन पर नाच रहा है !          किंतु एक नाम ऐसा है, जिसे यदि सर्प अथवा साँप के आगे उच्चारित कर लिया जाए, निश्चय ही साँप वहाँ से दुम-दुमाकर भाग खड़ा होगा ! जी हाँ ! यह बिल्कुल सच्च है, चाहे तो कभी परिक्षा करके स्वयँ ही इस सच्चाई की पुष्टि कर सके हैं ! इसी संदर्भ में एक प्रसंग प्रस्तुत है, जिसमें आपको यह भी ज्ञात हो जाएगा कि किसका नाम सेनो से सर्प वापिस भाग जाता है !        अर्जुन के पौत्र अर्थात अभिमन्यु के पुत्र 'राजा परिक्षित' ने एक बार कलियुग के प्रभाव से एक मरा हुआ सर्प ध्यान मग्न एक ऋषि के गले में डाल दिया था ! जिससे ऋषि पुत्र ने क्...

शिव ध्यानम

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कर्तृत्व , भोक्तृत्व और निवारण

*कर्तृत्व , भोक्तृत्व और निवारण* जीे जैसे जल बिना किसी प्रयोजन के नीचे की और ही बहता है क्यूंकि नीचे की और बहना जल की प्रकृति है वैसे ही सृष्टि रचना करना ब्रह्म (परम) की प्रकृति ...

बीजाक्षरों का संक्षिप्त कोष

*बीजाक्षरों का संक्षिप्त कोष* *ऊँ*—प्रणव, ध्रव, तैजस बीज है। *ऐं*—वाग् और तत्त्व बीज है। *क्लीं*—काम बीज है। *हों*—शासन बीज है। *क्षीं*—पृथ्वी बीज है। *प*—अप् बीज है। *स्वा*—वायु ब...

दस महाविद्या शाबर मन्त्र

दस महाविद्या शाबर मन्त्र सत नमो आदेश । गुरुजी को आदेश । ॐ गुरुजी । ॐ सोऽहं सिद्ध की काया, तीसरा नेत्र त्रिकुटी ठहराया । गगन मण्डल में अनहद बाजा।  वहाँ देखा शिवजी बैठा, गुरु ह...