संदेश

तंत्र लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विवाह के सिद्ध उपाय

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  व्यक्ति की जन्मकुंडली से यह ज्ञात किया जा सकता है कि किन दोषों व किन दशाओं के कारण विवाह में बाधाएं आ रही हैं और उचित उपायों के माध्यम से इन सभी बाधाओं को दूर भी किया जा सकता है। आज हम आपको ऐसे ही कुछ विवाह बाधा दूर करने के उपाय बता रहे हैं,  जिनसे विवाह में होने वाले विलंब व अवरोधों को दूर किया जा सकता है। विवाह में देरी के उपाय/मंत्र: विवाह में आने वाली अड़चनें तथा गृह दोष आदि के निवारण के लिए कुछ मंत्र व साधनाएं प्रचलित हैं; जिनका जाप पूरा कर के आप अपने विवाह में आने वाली मुश्किलों को दूर कर सकते हैं। 1- अगर किसी कन्या के विवाह में विलंब हो रहा है, तो हर गुरूवार के दिन बरगद, केले या पीपल के वृक्ष पर बिना नागे के जल चढ़ाएं तथा निम्नलिखित मंत्र का जाप करें- “गौरी आवे ,शिव जो ब्याहवे, (लड़की का नाम) का विवाह तुरंत सिद्ध करें, देर ना करें, जो देर होए, तो शिव को त्रिशूल पड़े। गुरु गोरखनाथ की दुहाई फिरै।” शिव पार्वती जी का यह मंत्र जीवन के दोषों को समाप्त कर, विवाह का...

दक्षिणा काली

चित्र
हर हर महादेव  प्रिय पाठकों महाकाल संहिता के मतानुसार आद्यशक्ति ही दक्षिणा काली हैं । शिवचंद्र विद्यार्नव में ऐसा कहते हैं कि पुरुष का नाम दक्षिण है और शक्ति का नाम वामा । जब तक यह वाम और दक्षिण समान रूप से अवस्थान करते हैं , तब तक संसार बंधन रहता है। साधना के प्रभाव से यह वामा शक्ति, जागृत होकर जब दक्षिण शक्ति पुरुष को भी विजीत कर लेती है और उनके ऊपर आरूढ़ होकर दक्षिणानंद में निमग्न हो जाती है तब उसके प्रभाव से दक्षिण तथा वाम दोनों से अंश ही पूर्ण तत्व की प्राप्ति कर लेते हैं और तभी वे दक्षिणा काली कही जाती। पक्षांतर से वे दक्षिणामूर्ति भैरव से आराधिता हो करके दक्षिणा काली हैं।  हर हर महादेव।

वेदों में तंत्र सिद्धान्त

वेद में तन्त्र सिद्धान्त १. आगम साहित्य-सभ्यता के आरम्भ से चले आ रहे ३ प्रकार के स्रोत ग्रन्थों को आगम साहित्य कहते हैं- (१) वेद या निगम-इसमें मन्त्र-ब्राह्मण भाग, कल्प, रहस्य मार्जन आदि हैं। एवं वा अरेऽस्य महतोभूतस्य निःश्वसितमेतद्यदृग्वेदो यजुर्वेदः सामवेदो ऽथर्वाङ्गिरस इतिहास पुराण विद्या उपनिषदः श्लोकाः सूत्राण्यनुव्याख्यानानि व्याख्यानानि अस्यैवैतानि निःश्वसितानि। (बृहदारण्यक उपनिषद्, २/४/१०, शतपथ ब्राह्मण, १४/२/४/१०) एवमिमे सर्वेवेदा निर्मिताः, सकल्पाः, सरहस्याः, सब्राह्मणाः, सोपनिषत्काः, सेतिहासाः, सान्वाख्यानाः, सपुराणाः, सस्वराः, ससंस्काराः, सनिरुक्ताः, सानुशासनाः, सानुमार्जनाः, सवाकोवाक्याः॥ (गोपथ ब्राह्मण, पूर्व, २/९) ऋग्वेदं भगवोऽध्येमियजुर्वेदँ सामवेदमाथर्वणं चतुर्थमितिहासपुराणं पञ्चमं वेदानां वेदं पित्र्यँ राशिं दैवं निधिं वाकोवाक्यमेकायनं देवविद्यां ब्रह्मविद्यां भूतविद्यां क्षत्रविद्यां नक्षत्रविद्याँ सर्पदेवजनविद्यामेतद् भगवोऽध्येमि। (छान्दोग्य उपनिषद्, ७/१२) (२) पुराण-वेद का पूरक होने के कारण इसका उल्लेख भी वेद के अंग रूप में ही किया गया है।  ऋच सामानि छन्दांसि पु...

त्रिकाल दर्शन साधना

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  यह विधि अधिकारी गुरु से प्राप्त करने के पश्चात ही आरम्भ करे अथवा लाभ के स्थान पर हानि भी उठाना पड़ सकता है  । कुछ विशेष नियम कीलित है । साधना त्रिकाल-दर्शक गौरी-शिव मन्त्र विनियोगः- अनयोः शक्ति-शिव-मन्त्रयोः श्री दक्षिणामूर्ति ऋषिः, गायत्र्यनुष्टुभौ छन्दसी, गौरी परमेश्वरी सर्वज्ञः शिवश्च देवते, मम त्रिकाल-दर्शक-ज्योतिश्शास्त्र-ज्ञान-प्राप्तये जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- श्री दक्षिणामूर्ति ऋषये नमः शिरसि, गायत्र्यनुष्टुभौ छन्दोभ्यां नमः मुखे, गौरी परमेश्वरी सर्वज्ञः शिवश्च देवताभ्यां नमः हृदि, मम त्रिकाल-दर्शक-ज्योतिश्शास्त्र-ज्ञान-प्राप्तये जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ। कर-न्यास (अंग-न्यास)ः- ऐं अंगुष्ठभ्यां नमः (हृदयाय नमः), ऐं तर्जनीभ्यां नमः (शिरसे स्वाहा), ऐं मध्यमाभ्यां नमः (शिखायै वषट्), ऐं अनामिकाभ्यां हुं (कवचाय हुं), ऐं कनिष्ठिकाभ्यां वौषट् (नेत्र त्रयाय वौषट्), ऐं करतल-करपृष्ठाभ्यां फट् (अस्त्राय फट्)। ध्यानः- उद्यानस्यैक-वृक्षाधः, परे हैमवते द्विज- क्रीड...

गोगा जाहरवीर की जड़ी

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  गोगा जाहरवीर जी की छड़ी का बहुत महत्त्व होता है और जो साधक छड़ी की साधना नहीं करता उसकी साधना अधूरी ही मानी जाती है क्योंकि मान्यता के अनुसार जाहरवीर जी के वीर छड़ी में निवास करते है !  सिद्ध छड़ी पर नाहरसिंह वीर , सावल सिंह वीर , रख्ता वीर आदि अनेकों वीरों का पहरा रहता है !छड़ी लोहे की सांकले होती है जिसपर एक मुठा लगा होता है ! जब तक गोगा जाहरवीर जी की माड़ी में अथवा उनके जागरण में छड़ी नहीं होती तब तक वीर हाजिर नहीं होते , ऐसी प्राचीन मान्यता है ! ठीक इसी प्रकार जब तक गोगा जाहरवीर जी की माड़ी अथवा जागरण में चिमटा नहीं होता तब तक गुरु गोरखनाथ सहित नवनाथ हाजिर नहीं होते ! ड़ी अक्सर घर में ही रखी जाती है और उसकी पूजा की जाती है ! केवल सावन और भादो के महीने में छड़ी निकाली जाती है और छड़ी को नगर में फेरी लगवाई जाती है , इससे नगर में आने वाले सभी संकट शांत हो जाते है ! जाहरवीर के भक्त दाहिने कन्धे पर छड़ी रखकर फेरी लगवाते है ! छड़ी को अक्सर लाल अथवा भगवे रंग के वस्त्र पर रखा जा...

गुप्त-सप्तशती

ॐ-- *गुप्त-सप्तशती*--ॐ सात सौ मन्त्रों की ‘श्री दुर्गा सप्तशती, का पाठ करने से साधकों का जैसा कल्याण होता है, वैसा-ही कल्याणकारी इसका पाठ है। यह ‘गुप्त-सप्तशती’ प्रचुर मन्त्र-बीजों के होने से आत्म-कल्याणेछु साधकों के लिए अमोघ फल-प्रद है। इसके *पाठ का क्रम* इस प्रकार है। प्रारम्भ में *‘कुञ्जिका-स्तोत्र’* , उसके बाद *‘गुप्त-सप्तशती’* , तदन्तर *‘स्तवन‘* का पाठ करे। *कुञ्जिका-स्तोत्र म् अथवा सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् ॥* श्री गणेशाय नमः । ॐ अस्य श्रीकुञ्जिकास्तोत्रमन्त्रस्य सदाशिव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीत्रिगुणात्मिका देवता, ॐ ऐं बीजं, ॐ ह्रीं शक्तिः, ॐ क्लीं कीलकम्, मम सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । शिव उवाच श्रृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्‌। येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत्‌॥1॥ न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्‌। न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्‌॥2॥ कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्‌। अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्‌॥3॥ गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति। मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्‌। पाठमात्रेण संसिद्ध्‌येत् कुञ्जिकास्...

बीजाक्षरों का संक्षिप्त कोष

*बीजाक्षरों का संक्षिप्त कोष* *ऊँ*—प्रणव, ध्रव, तैजस बीज है। *ऐं*—वाग् और तत्त्व बीज है। *क्लीं*—काम बीज है। *हों*—शासन बीज है। *क्षीं*—पृथ्वी बीज है। *प*—अप् बीज है। *स्वा*—वायु ब...

दस महाविद्या शाबर मन्त्र

दस महाविद्या शाबर मन्त्र सत नमो आदेश । गुरुजी को आदेश । ॐ गुरुजी । ॐ सोऽहं सिद्ध की काया, तीसरा नेत्र त्रिकुटी ठहराया । गगन मण्डल में अनहद बाजा।  वहाँ देखा शिवजी बैठा, गुरु ह...