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अनुष्ठान के सामान्य नियम

सफल मन्त्रानुष्ठान के लिए साधक को नियम संयम विधि विधान के साथ साथ गुरु परामर्श, समय बाध्यता, स्वर, दिशा एवं ऐसे की कई अन्य नियमो का पालन आवश्यक होता है ही, कुछ अन्य नियम भी हैं, जिनका पालन करना आवश्यक होता है। प्राचीन कालीन ऋषि मुनियों ने इनका परीक्षण कर इनको अनुभूत किया तत्पश्चात इनकी व्यावहारिक उपयोगिता एवं प्रभाव को स्वीकार किया।   अनुभव के आधार मन्त्र विधान के अन्तर्गत साधक को जो निर्देश दिये गये है वे इस प्रकार से हैं - ♦   स्थान की भांति समय भी निश्चित रहे। साधना नियमित होनी चाहिए। ♦   स्नान करके शुद्ध व स्वच्छ वस्त्र पहनकर साधना स्थल में जाना चाहिए। ♦   दिनभर के पहने हुए वस्त्र अनुष्ठान के समय नहीं पहनने चाहिए। ♦   वस्त्र कम से कम हों। सिला हुआ वस्त्र पहनना वर्जित है। ♦   साधना स्थल पूर्णतया शान्त, सुरक्षित और एकान्त में हो। ♦   साधना काल में भोजन शुद्ध, सात्विक और सूक्ष्म होना चाहिए। ♦   साधना काल की अपनी अनुभूतियों का वर्णन नहीं करना चाहिए। ♦   आसन पर एक बार बैठ जाने पर बार-बार उठना उचित नहीं ह...