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मंगली दोष

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों------ मंगली दोष मंगल उष्ण प्रकृति का ग्रह है.इसे पाप ग्रह माना जाता है. विवाह और वैवाहिक जीवन में मंगल का अशुभ प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है. मंगल दोष जिसे मंगली के नाम से जाना जाता है इसके कारण कई स्त्री और पुरूष आजीवन अविवाहित ही रह जाते हैं.इस दोष को गहराई से समझना आवश्यक है ताकि इसका भय दूर हो सके. मंगली दोष का ज्योतिषीय आधार वैदिक ज्योतिष में मंगल को लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में दोष पूर्ण माना जाता है.इन भावो में उपस्थित मंगल वैवाहिक जीवन के लिए अनिष्टकारक कहा गया है.जन्म कुण्डली में इन पांचों भावों में मंगल के साथ जितने क्रूर ग्रह बैठे हों मंगल उतना ही दोषपूर्ण होता है जैसे दो क्रूर होने पर दोगुना, चार हों तो चार चार गुणा.मंगल का पाप प्रभाव अलग अलग तरीके से पांचों भाव में दृष्टिगत होता है जैसे: लग्न भाव में मंगल  लग्न भाव से व्यक्ति का शरीर, स्वास्थ्य, व्यक्तित्व का विचार किया जाता है.लग्न भाव में मंगल होने से व्यक्ति उग्र एवं क्रोधी होता है.य...

रन्ध्र तिथियां

चतुर्दशी  चतुर्थी  अष्टमी नवमी  षष्टी तथा द्वादशी तिथिया पक्ष रन्ध्र कहलाती है।  इनमे विवाह होने पर स्त्री विधवा हो जाती है। उपनयन होने पर  बटु व्रात्य (संस्कार हीन) होता है। सीमन्त करने पर गर्भ नष्ट। अन्नप्राशन करने पर मरण तथा गृहारम्भ करने पर अग्निकांड,  मंदिर की प्रतिष्ठा करने पर  राजा व प्रजा नाश  होता है अर्थात जो भी कर्म किये जाए वह नष्ट होते हैं।  अति आवश्यक होने पर -  चतुर्थी को ८, षष्टी को ९, अष्टमी को १४,  नवमी को २५, द्वादशी को १०, चतुर्दशी को तिथि आरम्भ की ५घड़ियां छोड़ देना चाहिये

कुंडली में कारक, अकारक और मारक ग्रह की परिभाषा

कुंडली में कारक, अकारक और मारक ग्रह की परिभाषा  〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ ग्रहों को नैसर्गिक ग्रह विचार रूप से शुभ और अशुभ श्रेणी में विभाजित किया गया है। बृहस्पति, शुक्र, पक्षबली चंद्रमा और शुभ प्रभावी बुध शुभ ग्रह माने गये हैं और शनि, मंगल, राहु व केतु अशुभ माने गये हैं। सूर्य ग्रहों का राजा है और उसे क्रूर ग्रह की संज्ञा दी गई है। बुध, चंद्रमा, शुक्र और बृहस्पति क्रमशः उत्तरोत्तर शुभकारी हैं, जबकि सूर्य, मंगल, शनि और राहु अधिकाधिक अशुभ फलदायी हैं। कुंडली के द्वादश भावों में षष्ठ, अष्टम और द्वादश भाव अशुभ (त्रिक) भाव हैं, जिनमें अष्टम भाव सबसे अशुभ है। षष्ठ से षष्ठ - एकादश भाव, तथा अष्टम से अष्टम तृतीय भाव, कुछ कम अशुभ माने गये हैं। अष्टम से द्वादश सप्तम भाव और तृतीय से द्वादश - द्वितीय भाव को मारक भाव और भावेशों को मारकेश कहे हैं। केंद्र के स्वामी निष्फल होते हैं परंतु त्रिकोणेश सदैव शुभ होते हैं। नैसर्गिक शुभ ग्रह केंद्र के साथ ही 3, 6 या 11 भाव का स्वामी होकर अशुभ फलदायी होते हैं। ऐसी स्थिति में अशुभ ग्रह सामान्य फल देते हैं। अधिकांश शुभ बलवान ग्रहों की 1, 2, 4,...

एकादश भाव को शुभ कैसे करें

●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●  एकादश भाव शुभ कैसे करे ज्योतिष में कुंडली का एकादश भाव जो लाभ भाव हम कहते हैं,,,जिसके लिए कहा जाता है,यहां सभी ग्रह अक्सर शुभ फलदाई ही होते हैं,,जिसकी वजह से ही रावण ने सभी ग्रह को एकादश भाव बिराजित कर दिया था, जिससे उसका पुत्र अजय हो जाए,,,इसलिए वास्तव ये भाव अति महत्वपूर्ण और अच्छा होना चाहिए, कर्म करे लाभ न हो तो,,धन हो पर उससे बेकार में ही पैसा खर्च होता हो तो,,,भाग्य अच्छा हो फिर भी भाग्यशाली न हो सके तो,,अच्छी पढ़ाई की अच्छा ज्ञान हो फिर भी जॉब इंटरव्यू और परीक्षा में निष्फल होना एक दो अंक से रह जाना, पढ़ाई की हो मोके पर याद न आना, जॉब मिल जाए पर एक दो कागज या कोई व्यक्तिगत समस्या से जॉब न मिल पाना, गुस्सा से जॉब छोड़ देना फिर पछताना,,और कितना भी अच्छा चीज क्यू न रखो अच्छा लाभ ग्राहक को क्यू न दो फिर भी कोई खरीदता नहीं चीज,,स्त्री पूरा दिन काम करे फिर भी उलाहे ही मिले,,और कोई रेस्पेक्ट नहीं मिलती,,, ये सब समस्या लाभ भाव पर निर्भर करता है,,,यदि वो खराब हो अच्छा फल न दे तो ये समस्या से जूझना पड़ता है,,,इसको अच्...

मंगल ग्रह 2

भारतीय वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को मुख्य तौर पर ताकत और मर्दानगी का कारक माना जाता है। मंगल प्रत्येक व्यक्ति में शारीरिक ताकत तथा मानसिक शक्ति एवम मजबूती का प्रतिनिध...

नव ग्रहों के कारकतत्व।

नव ग्रहों के कारकतत्व। सूर्य👉पिता, आत्मा, प्रताप, आरोग्यता, आसक्ति, अनुशासन ,समय का पाबंद , सरकार का विचार करें। चन्द्रमा👉 मन, बुद्धि, राजा की प्रसन्नता, माता और धन का विचार क...

शनि-चंद्र का विष योग।

शनि-चंद्र का विष योग। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि-चन्द्र विष योग किसी भी जातक के लिए बेहद खतरनाक होता है। जब चंद्रमा शनि के साथ गोचर करता है तो इस ‘विष योग’ का निर्माण होत...

कुण्डली के बारह भावों की महादशा ।

कुण्डली के बारह भावों की महादशा । कुण्डली के प्रत्येक भाव की महादशा भिन्न भिन्न फल प्रदान करने वाली होती है. बारह भावों में स्थित शुभ और अशुभ प्रभाव जातक के जीवन को पूर्ण र...