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अष्टम भाव में शनि के फल।

अष्टम भाव में शनि के फल। जन्मकुंडली में फलादेश करते हुए कुंडली का आठवा भाव और शनि दोनों ही बड़े महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कुंडली में अष्टम भाव को आयु का स्थान माना जाता है (क...

मंगल ग्रह 2

भारतीय वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को मुख्य तौर पर ताकत और मर्दानगी का कारक माना जाता है। मंगल प्रत्येक व्यक्ति में शारीरिक ताकत तथा मानसिक शक्ति एवम मजबूती का प्रतिनिध...

मंगल ग्रह

ज्योतिष में मंगल ग्रह को मुख्य तौर पर एक सेनापती के रुप में दर्शाया गया है. यह ताकत, साहस और पौरुष का कारक है. मंगल ग्रह शारीरिक तथा मानसिक शक्ति और ताकत का प्रतिनिधित्व करता ...

नव ग्रहों के कारकतत्व।

नव ग्रहों के कारकतत्व। सूर्य👉पिता, आत्मा, प्रताप, आरोग्यता, आसक्ति, अनुशासन ,समय का पाबंद , सरकार का विचार करें। चन्द्रमा👉 मन, बुद्धि, राजा की प्रसन्नता, माता और धन का विचार क...

शनि-चंद्र का विष योग।

शनि-चंद्र का विष योग। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि-चन्द्र विष योग किसी भी जातक के लिए बेहद खतरनाक होता है। जब चंद्रमा शनि के साथ गोचर करता है तो इस ‘विष योग’ का निर्माण होत...

ज्योतिष मे केतु ग्रह

ज्योतिष मे केतु ग्रह। सभी ग्रहों में राहु-केतु मायावी ग्रह हैं इन पर सटीक फलित करना अत्यधिक जटिल है। राहु पर थोडा बहुत लिखा हुआ मिल भी जाता है, लेकिन जब केतु की बात आती हैं उस ...