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बगला प्रत्यंगिरा स्तोत्र

|| बगला प्रत्यंगिरा स्तोत्र || विनियोग-ओं अस्य श्री बगला-प्रत्यंगिरा मन्त्रस्य नारद ऋषिः, त्रिष्टुप छन्दः, प्रत्यंगिरा देवता, हलीं बीजं, हूं शक्तिः, ह्रीं कीलकम् हलीं हलीं हलीं हलीं प्रत्यंगिरा मम शत्रु विनाशे विनियोगः।  (दाएं हाथ में जल लेकर जल पृथवी पर डालें।)  फिर पाठ प्रारम्भ करें। संकल्प 10 हजार का करें। वर्तमान में 4 गुना करने पर फलदायी होता है।   मंत्र- ओं प्रत्यंगिरायै नमः प्रत्यंगिरे सकलकामान् साधय मम रक्षां कुरू कुरू सर्वान् शत्रून् खादय खादय मारय मारय घातय घातय ओं हलीं फट् स्वाहा। ओं भ्रामरी स्तंभिनी देवी क्षोभिणी मोहिनी तथा। संहारिणी द्राविणी च जृम्भिणी रौद्ररूपिणी।। इत्यष्टौ शक्तयो देवि शत्रुपक्षे नियोजिताः। धारयेत् कण्ठदेशे च सर्वशत्रुविनाशिनी।। ओं हलीं भ्रामरी मम शत्रून् भ्रामय भ्रामय ओं हलीं स्वाहा। ओं हलीं स्तंभिनी मम शत्रून् स्तंभय स्तंभय ओं हलीं स्वाहा। ओं हलीं क्षोभिणी मम शत्रून् क्षोभय क्षोभय ओं हलीं स्वाहा। ओं हलीं मोहिनी मम शत्रून् मोहय मोहय ओं हलीं स्वाहा। ओं हलीं संहारिणी मम शत्रून् संहारय संहारय ओं हलीं स्वाहा। ओं हलीं द्राविणी मम शत्रून् द्रावय ...