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एकादशमुखी हनुमान

एकादशमुखी हनुमानजी के रहस्य एवं कवच 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ एकादशमुखी हनुमानजी महात्म्य 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ शंकर जी बोले हे उमा ! परम भक्ति पद एकादश मुखी हनुमान जी का चरित्र ,इन्द्रियों से फ़ांस छुड़ाने वाला, इस संसार सागर से मोक्ष दिलाने वाला, सब संकट, दु:ख,ताप, भय को हरने वाला है। सुनो  दोहा भए पुकारत सुरन्ह सब, त्राहि त्राहि परमेश।  सीय रमन करुन अयन, हरहु हमर कलेश।। शिवजी कहते है कि - कालकारमुख नामक एक भयानक बलवान राक्षस हुआ। ग्यारह मुख वाले उस विकराल राक्षस ने बहुत काल तक ब्रम्हा जी की कठोर ताप किया। उसके ताप से प्रसन्न हो कर ब्रम्हा जी ने कालकार मुख राक्षस से कहा की हे तात मुझसे वर मांगो। असुर बोला कि हे कर्तार-आप मुझे ऐसा वर दीजिये -"मुझे कोई भी जीत न पावे ,रण में सामने काल भी क्यों न हो! जो मेरे जनम की तिथि पर ग्यारह मुख धारण करे वही मुझे मारे "तथास्तु कहकर चतुरानन ब्रम्हा जी अन्तर्ध्यान हो गए। वरदान पाकर अभिमानी असुर जगत में मनमानी करने लगा। उसने देवताओ के सभी अधिकार छीन लिए तथा श्रुतियो के सभी आचार भ्रष्ट कर दिए। संसार अति त्रस्त हो गया एवं अपार हाहाकार मच गया।...

बजरंग बाण सिद्धि

बजरंग बाण सिद्ध करने की विधि 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ इस लेख में हम हनुमान जी के बजरंग बाण के रात्रि में किये जाने वाले पाठ के विषय में बता रहे है। वैसे तो बजरंग बाण का नियमित रूप से पाठ आपको हर संकट से दूर रखता है। किन्तु अगर रात्रि में बजरंग बाण को इस प्रकार से सिद्ध किया जाये तो इसके चमत्कारी प्रभाव तुरंत ही आपके सामने आने लगते है। अगर आप चाहते है अपने शत्रु को परास्त करना या फिर व्यापर में उन्नति या किसी भी प्रकार के अटके हुए कार्य में पूर्णता तो रात्रि में नीचे दिए अनुसार बजरंग बाण पाठ को अवश्य करें। विधि इस प्रकार है : –  〰️〰️〰️〰️〰️〰️ किसी भी मंगलवार को रात्रि का 11 से रात्रि 1 बजे तक का समय सुनिश्चित कर ले, बजरंग बाण का पाठ आपको 11 से रात्रि 1 तक करना है, सबसे पहले आप एक चौकी को पूर्व दिशा की तरफ स्थापित करें अब इस चौकी पर एक पीला कपडा बिछा दे, अब आप इस मंत्र को एक कागज पर लिख कर इसे फोल्ड करके इस चौकी पर रख दे।  मंत्र इस प्रकार है :  “ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ”  अब आप चौकी के दायें तरफ एक मिटटी के दिए में घी का दीपक जला दे। आपको इस चौकी के सामने आसन...

हनुमान के भाई

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●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  हनुमान के कितने भाई? ‘रामायण’ से लेकर ‘उत्तर रामायण’ तक सब देख-सुन जाने के बाद भी ऐसा तो कहीं नहीं मिला. न तो महर्षि वाल्मीकि ने अपनी ‘रामायण’ में ये बताया, न ही गोस्वामी तुलसीदास ने अपने महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ में इसका वर्णन किया. फिर हनुमान के सगे भाइयों की कहानी कहां लिखी है? ‘ब्रह्मांड पुराण’ में विस्तार से लिखा है दरअसल, हनुमान के पिता केसरी के विवाह और उनके पुत्रों के बारे में विस्तार से बताया गया है पुराणों में. ‘ब्रह्मांड पुराण’ और ‘वायु पुराण’ में वानरों की वंशावली के साथ-साथ कई अनूठी कहानियां मिलती हैं. ‘ब्रह्मांड पुराण’ में लिखा है कि केसरी ने कुंजर की पुत्री अंजना को पत्नी के रूप में स्वीकार्य किया. अंजना के गर्भ से और वायु के अंश से हनुमान का जन्म हुआ. अंजना के गर्भाधान संस्कार और पुंसवन संस्कार की भी जानकारी दी गई है. पुराण में अंजना को रूपवती भी बताया गया है. इसी पुराण में हनुमान के पांच भाइयों के बारे में क्रम से बताया गया है. उनमें सबसे ब...

संकट मोचन हनुमान स्तोत्र

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●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●         ❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗ ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬● 👉🏻 प्रिय पाठकों-------  संकट मोचन हनुमान स्तोत्र काहे विलम्ब करो अंजनी-सुत । संकट बेगि में होहु सहाई ।। नहिं जप जोग न ध्यान करो । तुम्हरे पद पंकज में सिर नाई ।। खेलत खात अचेत फिरौं । ममता-मद-लोभ रहे तन छाई ।। हेरत पन्थ रहो निसि वासर । कारण कौन विलम्बु लगाई ।। काहे विलम्ब करो अंजनी सुत । संकट बेगि में होहु सहाई ।। जो अब आरत होई पुकारत । राखि लेहु यम फांस बचाई ।। रावण गर्वहने दश मस्तक । घेरि लंगूर की कोट बनाई ।। निशिचर मारि विध्वंस कियो । घृत लाइ लंगूर ने लंक जराई ।। जाइ पाताल हने अहिरावण । देविहिं टारि पाताल पठाई ।। वै भुज काह भये हनुमन्त । लियो जिहि ते सब संत बचाई ।। औगुन मोर क्षमा करु साहेब । जानिपरी भुज की प्रभुताई ।। भवन आधार बिना घृत दीपक । टूटी पर यम त्रास दिखाई ।। काहि पुकार करो यही औसर । भूलि गई जिय की चतुराई ।। गाढ़ परे सुख देत तु हीं प्रभु । रोषित देखि के जात डेराई ।। छाड़े हैं माता पिता परिवार । पराई गही शरणागत आई ।। जन्म अकारथ जात चले । अनुमान बिना नहीं कोउ सहाई ।। मझ...

हनुमान_पुत्र_मकरध्वज

*💥हनुमान_पुत्र_मकरध्वज💥* हनुमान रामायण कथा के सबसे अहम् पात्र कहे जाते हैं | हनुमान जो कि पवनपुत्र कहे जाते हैं श्री राम के सेवक थे जिन्होंने आजीवन अपने स्वामी श्री राम का स...

हनुमानजी के दस रहस्य

हनुमानजी के दस रहस्य 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️   हनुमानजी इस कलियुग के अंत तक अपने शरीर में ही रहेंगे। वे आज भी धरती पर विचरण करते हैं। वे कहां रहते हैं, कब-कब व कहां-कहां प्रकट होत...