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108 का निर्णय

संख्या 108 का महत्व................. संख्या 108 का महत्व: 108 का रहस्य ! (The Mystery of 108) वेदान्त में एक मात्रकविहीन सार्वभौमिक ध्रुवांक 108 का उल्लेख मिलता है जिसका हजारों वर्षों पूर्व हमारे ऋषियों (वैज्ञानिकों) ने अविष्कार किया था l मेरी सुविधा के लिए मैं मान लेता हूँ कि, 108 = ॐ (जो पूर्णता का द्योतक है) प्रकृति में 108 की विविध अभिव्यंजना : 1. सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी/सूर्य का व्यास = 108 = 1 ॐ 150,000,000 km/1,391,000 km = 108 (पृथ्वी और सूर्य के बीच 108 सूर्य सजाये जा सकते हैं) 2. सूर्य का व्यास/ पृथ्वी का व्यास = 108 = 1 ॐ 1,391,000 km/12,742 km = 108 = 1 ॐ सूर्य के व्यास पर 108 पृथ्वियां सजाई सा सकती हैं . 3. पृथ्वी और चन्द्र के बीच की दूरी/चन्द्र का व्यास = 108 = 1 ॐ 384403 km/3474.20 km = 108 = 1 ॐ पृथ्वी और चन्द्र के बीच १०८ चन्द्रमा आ सकते हैं . 4. मनुष्य की उम्र 108 वर्षों (1ॐ वर्ष) में पूर्णता प्राप्त करती है . वैदिक ज्योतिष के अनुसार मनुष्य को अपने जीवन काल में विभिन्न ग्रहों की 108 वर्षों की अष्टोत्तरी महादशा से गुजरना पड़ता है . 5. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न ...