सुमेरु का उलंघन क्यों नही करना चाहिए
हर हर महादेव बहुत ही सुंदर जिज्ञसा है विशेष जिज्ञासा🙏🏻 जप करते समय जपमाला में जो सुमेरु होता है उसे लांघना क्यूं नही चाहिये इसका क्या कारण है । और माला में सुमेरु क्यों दिया गया है कृपया आप सभी विद्वत जन मार्गदर्शन करें🙏🏻🙏🏻🙏🏻 🌹आचार्य विनय शुक्ल विराट🌹 काशी *प्रतिउत्तर* मेरु का अर्थ क्या है ? पर्वत और मेरुदंड । सु लगाने से समेरु बना है । ज्ञान हमेशा ही प्रतिक के द्वारा दिया जता है दुसरा माध्यम संभव ही नहीं है वर्ण स्वर शब्द अंक सब प्रतीक थे है रहेंगे। साहित्य इतीहास धर्म अघ्यात्म का ज्ञान भी इनके द्वारा दिया जाता है । हमारा शरीर और ब्रह्मांड भी सब कुछ नाद बिन्दु से बना हुवा है बिन्दु को आध्यात्मिक चक्र का मनका कहते हैं शरीर के विन्दुओं को समझाने याद रखने हेतु माला के प्रतिक रचे गये सुमेरु सबका आदी ब्रहम रन्घ्र है उसे छोड़कर सब कुछ परिवर्तनीय है वह अपरिवर्तनीय है सुमेरु को न लांघना एक मर्यादा है मंत्र और माला के मध्य के सम्बन्धो का । जिससे यह भी ज्ञात होता है की मुख्य रूप से जो सभी को साथ...