जीवन मे नियम की आवश्यकता
●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●
❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗
●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●
👉🏻 प्रिय पाठकों-------
एक व्यवस्थित जीवन जीने के लिए जीवन में नियमों का पालन अपरिहार्य है। नियमरहित जीवन एक अवस्था के बाद भार में परिवर्तित हो जाता है और हमें अपना ही शरीर भारवत प्रतीत होने लगता है। भारतीय ज्ञान-परंपरा में हम जब भी जीवन के संदर्भ में चर्चा करते हैं, तब योग की प्राथमिकता से हम अवगत होते हैं।अष्टांग योग का द्वितीय सोपान नियम है। नियम के बगैर इस संसार में कुछ भी चलायमान नहीं है। सूर्य नित्य बिना किसी आलस्य और व्यर्थ की प्रतिस्पर्धा के बगैर निरंतर हर दिन उगता है और चंद्रमा भी स्थितप्रज्ञ के समान अपने हिस्से की चांदनी बिना किसी रोक-टोक के बिखेरता है। प्रकृति का सब कुछ नियमबद्ध है और जब यह नियमबद्धता टूटती है, तब प्रकृति का सुंदर हरा-भरा कलेवर भी हमें रास नहीं आता।जब प्रकृति नियमों पर इतनी अडिग है तो भला वह मनुष्य को उच्छृंखल होने के लिए कैसे छोड़ सकती है? प्रकृति जब अपने नियम से हटती है तब विकराल घटनाएं घटती हैं और विध्वंस होता है। प्रकृति के समान ही जीवन में भी नियमबद्धता आवश्यक है। किसी भी प्रकार का सृजन नियम के बगैर नहीं हो सकता। शैव दर्शन के अनुसार जब भी नियंता सृष्टि की रचना करते हैं, तब सृष्टि को वे नियमबद्ध करते हैं। उसकी सीमाओं का निर्धारण करते हैं। ठीक उसी प्रकार जब भी हम कोई चित्र बनाते हैं या कोई व्यंजन बनाते हैं तब हम समस्त सामग्री को एक रूप प्रदान करते हैं, उसे विशेष रूप में नियमित करते हैं। वह अपने उस रूप के अतिरिक्त किसी अन्य रूप में नहीं हो सकती। यह भी नियम का एक रूप है। इसलिए नियमबद्धता का गहन अनुसरण अपरिहार्य है। तभी जीवन सुचारु रूप से संचालित होगा, अन्यथा वर्षा ऋतु में उफनती नदी के समान जीवन व्यर्थ ही प्रवाहित होता रहेगा। आधुनिक विज्ञान भी इस तथ्य को स्वीकार कर चुका है कि पृथ्वी ही नहीं बल्कि ग्रह, नक्षत्रों और आकाश गंगाओं या फिर दूसरे शब्दों में कहें तो समूचा ब्रह्मंड नियमों से ही संचालित हो रहा है।ग्रह-नक्षत्र एक सुनिश्चित नियम के अनुसार ही अपनी-अपनी कक्षाओं में परिभ्रमण कर रहे हैं। तभी तो महानतम वैज्ञानिक अॅल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा है कि ब्रह्मंड में जो नियबद्धता व्याप्त है वह विलक्षण है। इस विलक्षणता को देखकर मानो ऐसा प्रतीत होता है कि कोई अदृश्य शक्ति शायद इस ब्रह्मांड को संचालित कर रही है।
सम्पूर्ण---🖌
●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●
आप हमारे अन्य प्रसारण माध्यम से जुड़ सकते है ,
📡 ब्लॉग
Aachary Rudreswaran
👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻 http://mangalamshiva.blogspot.com/?m=1
📡 टेलीग्राम
👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼👇🏼
https://t.me/AacharyRudreshwaran
📡 शिव सायुज्य
👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
https://t.me/shivsayujy
📡 व्हाट्सअप
👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
आचार्य रुद्रेश्वरन-9956973754
आचार्य देव शुक्ल-7607121234
🔝🔝🔝🔝🔝🔝🔝🔝🔝
उपर के किसी भी एक नंबर पर YES शब्द लिख कर भेजें और आप अधिक से अधिक धार्मिक,आध्यात्मिक एवं सनातन धर्म उत्थान हेतु अधिक से अधिक विवारण प्राप्त कर सकते है।
धन्यवाद।
●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●
*🙆🏼♂‼जय श्री अवंतिकानाथ‼🙆🏼♂*
🔔‼‼‼‼‼🔔
🕉🙏🏻🕉
टिप्पणियाँ