सूर्य ग्रहण के बाद करने योग्य कृत्य एवम उपया
۞ஜ▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬ஜ۞
*हर हर महादेव*
●▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬●
प्रिय पाठकों .....
शास्त्रों में साधना से पहले विविध कर्मों का विधान किया है ताकि दुष्प्रभावों का बचकर आत्मिक उन्नति प्राप्त की जा सके। ऐसे विधानों में स्नान, दान का विशेष महत्त्व बताया गया है। जब तक ग्रहण काल रहे तब तक पूजा-पाठ, दान आदि करना चाहिए। सूर्य अथवा चंद्र ग्रहण होने से समस्त वर्ण के लोगों को सूतक होता है, अतः सूतक से निवृत होेने के लिए स्नान आवश्यक होता है-
*‘सर्वेषामेव वर्णानां सूतकं राहुदर्शने।*
*सचैल तु भवेत्स्नानां सूतकान्नं विवर्जयेत्।’*
*स्नान हेतु तीर्थों के जल का विशिष्ट महत्त्व बताया गया है। ग्रहण काल के प्रारंभ होते ही स्नान कर लेना चाहिए। ग्रहण काल में औषधि स्नान का भी विशेष महत्व है। औषधि स्नान हेतु दूर्वा, खस, शिलाजीत आदि औषधियों को जल में डालकर, पुनः उससे स्नान करने से ग्रहणजन्य अनिष्ट का नाश होता है।*
स्नानोपरांत निम्नलिखित स्तोत्र का 11 बार पाठ करना चाहिए-
*योऽसौ वज्रधरो देव आदित्यानां प्रयत्नतः।* *सहस्रनयनः शक्त्रो ग्रहपीड़ां व्यपोहतु।।* *चतुः शृङ्गः सप्तहस्तः त्रिपादो मेषवाहनः।* *अग्निश्चन्द्रोपरागोत्थां ग्रहपीड़ां व्यपोहतु।।* *यः कर्मसाक्षी लोकानां धर्मो महिषवाहनः।* *यमश्चन्द्रोपरागोत्थां ग्रहपीड़ां व्यपोहतु।।* *रक्षोगणाधिपः साक्षात्प्रलयानलसन्निभः।* *खड्गचर्मातिकायश्च रक्षःपीड़ा व्यपोहतु।।* *नागपाशधरो देवः सदा मकरवाहनः।* *वरूणोम्बुपतिः साक्षाद्ग्रहपीड़ां व्यपोहतु।।* *प्राणरूपो हि लोकानां चारूकृष्णमृगप्रियः।* *वायुश्चन्द्रोपरागोत्थग्रहपीड़ां व्यपोहतु।।* *योऽसौ निधिपतिर्देवः खड्गशूलगदाधरः।* *चंद्रोपरागकलुषं धनदोऽत्र व्यपोहतु।।* *योऽसौविन्दुधरो देवः पिनाकी वृषवाहनः।* *चंद्रोपरागजां पीड़ां स नाशयतु शंकरः।।* *तैलोक्ये यानि भूतानि स्थावराणि चराणि च।* *ब्रह्माविष्ण्वर्कयुक्तानि तानि पापं दहंतु मे।।* *आमंत्रणे लेखने चाप्येते पूजनमंत्रकाः।* *अर्चयित्वा पितृन्देवान् गोभूस्वर्णवरादिभिः।।* *अनेन विधिना यस्तु ग्रहस्नानं समाचरेत।* *न तस्य ग्रहपीड़ा स्याद्यानबन्धुधनक्षयः।।* *परमा सिद्धिमाप्नोति पुनरावृत्तिदुर्लभाम्।* *सूर्यग्रहेप्येवमेव सूर्यनाम्ना विधीयते।।*
ऐसी मान्यता है कि इस स्तोत्र के पाठ से ग्रहणजन्य समस्त अरिष्टों का नाश हो जाता है।
सम्पूर्ण.....🖌️
🕉️ *।कालेन समौषधम्।* 🕉️
۞ஜ▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬ஜ۞
*हर इक्षा हर की*
۞ஜ▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬ஜ۞
🌺 *ज्योतिषाचार्य वास्तुविद निगमागमोक्त*
*प्रवीण आचार्य श्री रुद्रेश्वरन गर्ग*🌺
टिप्पणियाँ