बांस जलाना वर्जित
मना है ऐसा कहीं भी उल्लेख अप्राप्त। एक आलेख किसी ने भेजा किन्तु वह सिद्धि हेतु द्रविड़ प्राणायाम है। मुझे सन्तुष्ट नही कर सका।👇🏻👇🏻😇
*हिन्दू धर्म में बांस को क्याें नहीं जलाना चाहिये*
बांस ना जलाने के निम्नलिखित कारण समाज में व्याप्त है |
*1. कहते हैं कि बांस जलाने से पितृ दोष लगता है |*
*2. बांस जलाने से वंश का नाश होता है |*
*3. बांस इसलिए नहीं जलाते कि उससे भगवान श्री कृष्ण की बांसुरी बनी थी |*
*4. बांस की विवाह उपनयन आदि में पूजा होती है इसलिए उसे नहीं जलाते |*
*5. विज्ञान के अनुसार बांस में लेड व हेवी मेटल प्रचुर मात्रा में होता है |लेड जलने पर ऑक्साइड बनता है जो एक खतरनाक नीरो टॉक्सिक है |*
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*अब प्रश्न यह है कि धर्मशास्त्र में इसका प्रमाण कहां है ?*
पंचभाष्य युक्त पारस्करगृह्य सूत्र पृष्ट 215
*भाष्यकार हरिहर*
*'' समिद्-आधानम्''* में मरीचि का बचन उद्धृत करते हुये लिखते हैं कि इस तरह की समिधा नही लेनी चाहिये -
*विशीर्णाः विदला-ह्रस्वा-वक्राः ससुपिराः कृशाः |*
*दीर्घा-स्थूला-घुणैर्जुष्टाः कर्मसिद्धि विनाशिकाः ||*
*वृक्षाः ये कंटकाकीर्णाः खदिरश्चेति वर्जितः |*
*कर्मसिद्धिं विनश्यन्ति त्वचिसारःकुलघातकः||*
*दूसरे श्लोक पर गाैर करें*
खदिरः च इति वर्जितः, ये कंटकाकीर्णाः वृक्षाः कर्मसिद्धिं विनश्यन्ति | त्वचिसारः कुलघातकः||
*अर्थात खादिर यानी खैर को छोड़कर जितने कटीले वृक्ष है यदि उनकी लकड़ी हवन में प्रयोग की जाती है तो जिस कार्य के लिए वह हवन किया जाता है उस कार्य की सिद्धि को वह नष्ट कर देती हैं | तथा त्वचिसार की लकड़ी यदि हवन में प्रयोग की जाती है तो वह कुल का विनाश करती है |
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*त्वचिसार क्या है?*
अमरकोष वनाैषधि वर्ग श्लोक संख्या 160 इसमें बांस के 10 नाम बताए गए हैं |
*वंशे त्वक्सार-कर्मार-त्वचिसार-तृणध्वजाः|*
*शतपर्व-यवफल-वेणु-मस्कर-तेजनाः ||*
1. वंश. 2. त्वक्सार. 3. कर्मार 4. त्वचिसार 5. तृणध्वज 6. शतपर्व 7. यवफल 8. वेणु 9. मस्कर 10. तेजन |
*अतः त्वचिसार वांस काे कहते हैं |*
*त्वचिसारः कुलघातकः*
बांस जलाने से कुल का नाश होगा |
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*अब प्रश्न यह उठता है कि बांस जलाने से कुल का नाश कैसे होगा ?*
तो जो विज्ञान की विधा है उसके अनुसार इसमें से जो जहरीली गैस निकलती है लेड और हैवी मैटल के जलने से ऑक्साइट बनता है जो कि एक खतरनाक न्यूरोटॉक्सिक है | इससे परिवार के सभी लोगों पर इसका प्रभाव पड़ेगा | क्योंकि कोई भी हवन पूजन यज्ञ हम परिवार के साथ ही बैठकर करते हैं | तो परिवार के ऊपर इस जहरीली गैस का प्रभाव पड़ने से सब बीमार पड़ेंगे और इससे जान का नुकसान भी हो सकता है |
*इसलिए हमारे ऋषियों ने बांस जलाने काे मना किया है*
इसे ग्राह्य समिधा में नहीं लिया है| उस समय ग्रन्थ में इसके शारीरिक वैज्ञानिक सामाजिक कारण नहीं लिखे जाते थे | सिर्फ ऐसा नहीं करना है इतना ही बताया जाता था| समाज उसका अनुकरण करता था | इसको समझने के लिए सूत्र बने हुए हैं जो गुरु परंपरा से सीखे जाते थे|
जैसे आज जब आप चेस्ट एक्सरे कराने जाते हैं तो टेक्नीशियन वहां सिर्फ 3 शब्द बोलता है सांस रोकिए सांस छोड़िए और जाइए|
इसके बाद हमारी रिपोर्ट आती है कि फेफड़े में पानी भरा है| यदि पेशेंट उस समय एक्सरे रूम में उससे पूछे कि इसमें तो लाइट जली नहीं कुछ हुआ नहीं आपने कैसे बता दिया कि चेस्ट में पानी भरा है ?
तो एक्सरे रूम सिर्फ एक्सरे खींचने के लिए होता है उसे समझाने के लिए नहीं होता है| उसके लिए आपको अलग से 3 साल लगातार अध्ययन करना पड़ता है | इसी तरह सूत्र लिखे गए हैं | वह सिर्फ ऐसा करना है ऐसा नहीं करना इतना ही लिखा गया है | इसको समझने के लिए गुरु परंपराएं थी जहां आश्रम में जाकर लोग उसको तरीके से समझते थे |
तो यह पारस्कर गृह्य सूत्र में मरीच का वचन जो हरिहर भाष्यकार ने उद्धृत किया है |🙏🌷
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