गवय श्रृंगी
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❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗
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गवय श्रृंग
श्रृंगी या गवय या जलधारी आदि नाम से विख्यात भगवान का अभिषेक करने में प्रयुक्त होने वाला एक यन्त्र है । जिससे भगवान शिव का अभिषेक करते समय विग्रह पर जल सतत गिरता रहता है और जल धारा न टूटने में सहायक सिद्ध होती है ।
जो प्राचीन काल मे गाय के सिंघ के खोल से बनाया जाता था ।जो स्वयम ही सींग से पृथक हो जाते थे उन श्रृंग का संचय कर के , नाम गवय श्रृंग था ।
परन्तु वर्तमान में सिंग सुलभता से प्राप्त न होने के कारण कई अन्य धातुओं से निर्माण किया
जाने लगा जैसे की स्वर्ण,रजत,पीतल,ताम्र आदि ।
भगवान शिव को अभिषेक प्रिय है इसीलिए पुराणों में कहा गया है कि -
गणेशं ताम्रपात्रेंण स्वर्णपात्रेंण जगदम्बिका।
शिवम गवय श्रीगेंण विष्णुम शङ्खवारीना ।
रुद्राष्टाध्यायी के अनुसार शिव ही रूद्र हैं और रुद्र ही शिव है। रुतम्-दु:खम्,और शिव को अभिषेक करने से उद्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: अर्थात रूद्र रूप में प्रतिष्ठित शिव हमारे सभी दु:खों को शीघ्र ही समाप्त कर देते हैं। वस्तुतः जो दुःख हम भोगते है उसका कारण हम सब स्वयं ही है हमारे द्वारा जाने अनजाने में किये गए प्रकृति विरुद्ध आचरण के परिणाम स्वरूप ही हम दुःख भोगते हैं।
वर्तमान में रुद्र अभिषेक जैसे अनुष्ठान में गवय अर्थात गौ सिंघ न प्राप्त हो तो उसके स्थान पर गौ मुख( जो धातु से बना हो) वाले किसी भी धातु से निर्मित श्रृंगी का प्रयोग होता आ रहा है ।
सभी धातु के शृंगी का अपना पृथक महत्व है
अष्टधातु से बने शृंगी से पूजन-अर्चन करने से कष्टों का नाश होता है। ताम्र - दीर्घायु जीवन प्राप्त कराता है । पीतल-अभीष्ट सिद्धि के देने वाला होता है। चांदी- सुख प्राप्ति हेतु उपयोगी है और पित्र प्रशन्न होते है ।स्वर्ण- स्थिर लक्ष्मी के लिए प्रयोग होता है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
हर हर महादेव
सम्पूर्ण---🖌
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