जन्म और अवतार में अंतर
सामान्य जीव अवतार नही लेते और नही प्रकट हो सकते है
बल्कि जीव जन्म लेते है जो मां के गर्भ से हो कर सम्भव है
जैसा कि आप।जानते है कि अवतार का अर्थ अवतरण से है
जन्म और अवतार में इस तरह आप अंतर समझिए कि जन्म लेना अर्थात वैसा जीव पहले से उसी क्रिया के माध्यम से जन्म लिया परन्तु अवतार एक ही होता है अर्थत जो नही है वह जब उतरता है तो अवतरण यानी अवतार होता है।
सामान्तया जब जीव उत्पन्न हो कर पाप से भरे कृत्यों की अधिकता से सभी साधु संतों का सन्तप्त करता है तब भगवान का अवतरण होता है जीव की मुक्ति हेतु एवम पाप से मुक्त करने हेतु
जीव में पाप करने की शक्ति है जबकि अवतार में पाप हरने की शक्ति है
नही दिया जा सकता
सामान्य जीव अवतार नही लेते और नही प्रकट हो सकते है
बल्कि जीव जन्म लेते है जो मां के गर्भ से हो कर सम्भव है
अर्थात जिसने मां के गर्भ से जन्म लिया है उनको अवतरण या प्रकट दिवस बधाई नही दी सकती है
जैसा कि आप।जानते है कि अवतार का अर्थ अवतरण से है
जन्म और अवतार में इस तरह आप अंतर समझिए कि जन्म लेना अर्थात वैसा जीव पहले से उसी क्रिया के माध्यम से जन्म लिया परन्तु अवतार एक ही होता है अर्थत जो नही है वह जब उतरता है तो अवतरण यानी अवतार होता है।
सामान्तया जब जीव उत्पन्न हो कर पाप से भरे कृत्यों की अधिकता से सभी साधु संतों का सन्तप्त करता है तब भगवान का अवतरण होता है जीव की मुक्ति हेतु एवम पाप से मुक्त करने हेतु
जीव में पाप करने की शक्ति है जबकि अवतार में पाप हरने की शक्ति है
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