21 जून 2020 सूर्य ग्रहण

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21 जून 2020 वलयाकार सूर्यग्रहण

सूर्य ग्रहण 21 जून को लगने जा रहा है. सूर्य ग्रहण का विशेष महत्व होता है. ज्योतिष अनुसार इस ग्रहण के बाद ऐसे योग बनेंगे जिससे कोरोना का संकट खत्म होना शुरू हो जायेगा और सितंबर तक स्थिति अनुकूल होने के आसार हैं. कोरोना वायरस का प्रकोप देश में कब कम होगा यह जानने के लिए सभी लोग परेशान है. इस दौरान कोरोना वायरस संक्रमितों की रफ्तार और तेज होती जा रही है. माना जा रहा है कि 21 जून को लग रहा सूर्य ग्रहण के बाद कुछ कोरोना वायरस का प्रभाव कम होगा.

धार्मिक दृष्टि से यह सूर्य ग्रहण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. बता दें कि यह ग्रहण, चंद्र ग्रहण के ठीक 16 दिन बाद लग रहा है इसलिए इसमें सूतक काल मान्य होगा. सूतक काल की अवधि 12 घंटे पहले से लग जाएगी. 21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण वलयाकार होगा. वलयाकार उस स्थिति को कहते हैं जब चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को नही ढक पाएगा. मतलब चंद्रमा, सूर्य को इस प्रकार से ढकता है, कि सूर्य का केवल मध्य भाग ही छाया क्षेत्र में आता है और पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता बल्कि सूर्य के बाहर का क्षेत्र प्रकाशित होने के कारण कंगन या वलय के रूप में चमकता दिखाई देता है.

ग्रहण और सूतकका समय
ग्रहण काल सुबह 10:31 से दोपहर 2:04 तक रहेगा। जिसकासूतक 20 जून को रात 10:20 से ही शुरू हो जाएगा।सूतक काल में बालक, वृद्ध एवं रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन नहीं करना चाहिए। इस दौरान खाद्य पदार्थो में तुलसी दल या कुशा रखनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को खासतौर सेसावधानी रखनी चाहिए। ग्रहण काल में सोना और भोजन नहीं करना चाहिए। चाकू, छुरी से सब्जी,फल आदि काटना भी निषिद्ध माना गया है।

विशेष--
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को अपना विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है. जिससे ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा का असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर न पड़ सकें, इसलिए ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है.

आहार---
वृद्ध ,रोगी,बच्चे,एवं आतुर को  छोड़ कर सूतक काल से ही किसी  को भी नही करना चाहिए ।

सूतक काल में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। ग्रंथों के अनुसारसूतक काल में पूजा पाठ और देवी देवताओं की मूर्तियों को भीछूने की मनाही है। इस दौरान कोई शुभ काम शुरू करना अच्छा नहीं माना जाता।
सूर्य ग्रहण के अशुभ असर से बचने के लिए प्रभावित राशि वाले लोगों को ग्रहण काल के दौरान महामृत्युंजय मंत्र के जप करना चाहिए या सुन भी सकते हैं। इसके अलावा जरुरतमंद लोगों को अनाज दान करें। ग्रहण से पहले तोड़कर रखा हुआ तुलसी पत्र ग्रहण काल के दौरान खाने से अशुभ असर नहीं होता।

ग्रहण का फल
मेष, सिंह, कन्या और मकर राशि वालों पर ग्रहण अशुभ प्रभाव नहीं रहेगा। जबकि वृष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ और मीन राशि वाले लोगों को सावधान रहना होगा। इसमें वृश्चिक राशि वालों को विशेष ध्यान रखना होगा। कंकण आकृति ग्रहण होने के साथ ही यह ग्रहण रविवार को होने से और भी प्रभावी हो गया है। इस सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान, दान और मंत्र जाप करना विशेष फलदायी रहेगा।

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