भागवत कहने के कुछ ध्यान देने हेतु बिंदु
कथा वाचक अपना टीम कैसे बना कर चलावे-टिप्स
नोट -■ कथा मे हर दस मिनट मे एक छोटा चुटकुला जो सामाजिक और ज्ञान दायक हो , जरूर रखें इसी अन्तराल मे २० मिनट मे ५ मिनट का भजन कथा प्रसंग से संबन्धित जरूर रखे
■ कथा वाचक - नशा मुक्त हो , अधिक खट्टा, मिट्ठा, तीखा , केला दही दोपहर तक जरूर खाए फिर नही , अपना कमरा स्पेशल रखे , सोप, लँवग, इलाइची, जेठी मधु, जीरा, पँचमेवा भर पूर (प्रसाद),गरम पानी, मधु, नींबू, गोलकी अपने पास जरूर रखे हर समय , जूस ,फल , अधिक ले , तेल मसाला कम ले ,
आगन्तुक भक्त को प्रसाद, फल आदर खूब दे , चाय पिलावे ,
आयोजक को प्रवास का राशन ,फलाहार, डेली निड का सामान का लिस्ट पहली एग्रीमेंट के समय ही दे दे, नियमावली पत्र भी शशक्त बनान , साफ सुथरा स्पष्ट हो,
■कथा तीन घन्टे या साढे तीन घन्टा का रखे , तो चुटकुला / ठिठोली १५ भजन , ७ कम से कम जरूर होना चाहिए ,
■कथा के प्रारम्भ मे और अन्त मे ३-३ मिनट की आरती जरूर करे ,
■ कथा फुलो की सुन्दर माला पहन कर करे यह माला यजमान दम्पति पहनाऐगा
और रोज इस दम्पति को बदल दे , एक माला मुर्ति या विग्रह को एक कथा वाचक को ,
■ कथा के पहले दिन यँत्र पुजा, मँच पुजा , और अन्तिम दिन सँगीत मण्डली को माला वस्त्र यजमान जरूर पहनावे और परिचय करावे सँगीतज्ञ का धुन से ,
■ कथा मँच का माडल एक ही रखे सब जगह
■ जो कथा कहे वह पुराण ,रामायण मँच पर जरूर रखें, रोज मार्किग कर कथा कहे ,
लिखित प्रपत्र भी सामने जरूर रखें तब बोले ,■ आयोजक के हेड , आचार्य, सन्त प्रमुख को पाँच मिनट जरूर बोलने दे , तब विषय प्रवेश करे ,
■ एनाउंसमेंट वाला आदमी भी हो ,
■
■ कथा वाचक मण्डली का प्रसाद भोजन आवास यज्ञ स्थल से दुर हो एकान्त मे हो ,
■ कथा वाचक कथा की पृष्ठभूमि समसामयिक बनाने भाषा सरल हो , जो प्रसंग रखे उसे पढ कर जाऐ ,
■ सँगीत मण्डली और कथा वाचक दोनो रोज मिटिंग कर विषय वस्तु भजन धुन की चर्चा और रियाज कर ले ,फिर कथा की समीक्षा करे यह मिटिंग जरूर हो ,भले भोजन न हो ,
■ भजन कथा वाचक और भजन मण्डली को याद रहना चाहिए
■ कोई फुहड धुन कथा मे नही बजाना चाहिए गजल, कव्वालि , भजन , नात पारम्परिक भजन, पुराने सार्गभित फिल्मी गीत जो प्रसंग को सेट करे जरूर रखे ,
■ भजन मण्डली और कथा वाचक पुरी डिसिप्लिन मे रहे अधिक बात चीत आम जनता से न करे ,
■ कथा मे बुजुर्गों को आगे और दाहिने तरफ सम्मान पुर्ण स्थान दे बायी ओर सँगीत मण्डली हो ,
■ कथा वाचक सुबह शाम यज्ञस्थल पर रोज निर्धारित समय पर जाऐ आचार्य से आशीर्वाद ले , आचार्य को दक्षिणा दे, सब ब्राह्मण को भी दे , कमिटी को भी चन्दा दे , आसपास के लोगो को मदद करे बच्चों के साथ चर्चा करे ,
■ कथा मण्डली -कथा वाचक अपने दिए आश्रम मे ही भोजन करे , दुसरे जगह जाऐ तो फल जूस चाय से अधिक कुछ न ले ,पर अधिक घरों मे न जाऐ,
■अपने मण्डली और यजमान से सँतुष्ट और खुश रहे और रखे भी ,
■ कथा शुरू होने से पहले मिटिंग करै फिर सोये एक घन्टा फिर फाइनल टच मिटिंग १५ मिनट का करे फिर संगीतज्ञ दल मँच का मैनेज करे , अपना यँत्र का सुर ताल धुन देकर मँच को आकर्षित करे , तीन मिनट का धुन दे , 1-हनुमान चालीसा का सँगीत दे , किसी दिन - 2-श्री रामचन्द्र कृपाल भजुमन ,३-भये प्रगट कृपा,४-जटाटाट विगलज्वल ५- अयिगिरि नन्दनी ६- ओम जय जगदीश हरे ७- वैष्णव जन ते
का म्यूजिक देकर समाप्ति के समय कथा वाचक मँच पर जाऐ , बैठे तो पूजन, आरती हो भोग लगे भगवान को , फिर छोटा मँगलाचरण हो रामधुन एक मिनट का हो कथा श्री गणेश
■ कथा वाचक अधिक हिल डोल न करे सावधानी से रहे , उतावला न हो , धीरे धीरे मुस्कान भरे शब्दों को बोले , शरीर के अँगुल को बार बार स्पर्श न करे ,
■ जहाँ वीर रस हो तो वीर की तरह भाषा रखे , प्रेम हो तो प्रेम से बोले , करूण भाव हो तो करूण भाव से भाषा की प्रस्तुति रखे श्रृंगार हो तो यही भाव हो , #कथा के भाव के अनुसार चेहरा मुह ललाट , आँख का इम्पेशन करे , कथा चेहरा से कहे भाव से कहे , दोनो हाथों हथेली आखेँ , ललाट , उंगली का इम्पेशन जरूर रखे ,
■ सँगीत मण्डली का कपडा, टीका चन्दन , चप्पल , पोशाक एक रँग ,माला , का हो , फुल डेस कोड ,
■ कथा वाचक का कपडा आकर्षक सुन्दर , दो चार माला , सुगन्धित तिलक अँगूठी , मोली , सुन्दर हो , अधिक चमकीला चटकीला न हो , कपडा कथा का रोज रोज अलग हो , कथा वाचक और मण्डली एक कलर का गमछे
रूमाल अपने पास रखे ,कथा दौरान पीने का पानी का बाठल भी रखे ,
■ कथा मण्डली कथा शुरू और समाप्त कर यज्ञ मण्डप का परिक्रमा तीन बार जरूर करे , दण्डवत प्रणाम करे आचार्य और सँत सबको को प्रणाम करे ,
■ कथा के बाद आरती के पहले यजमान को कथा वाचक अपनी ओर से रूद्राक्ष/कमलगठ्ठा का माला अपना संस्थान का पट्टा पहनाकर सम्मान करे , एक दिन मे ११ आदमी का जरूर माने , अपने मन्दिर का फोटो भी दे भेंट स्वरूप , इसके बाद आरती करे ,
■ कथा के पहले दिन कथा के बाद मिडिया वालो को माला प्रसाद ,चादर , देकर " नारद पूजन "कर लेना है ,
■ एम पी ,एम एल ए ,मँत्री ,जिला परिषद्, मुखिया, सरकारी अधिकारी को " राजा वन्दन " नाम से सम्मानित करना है ,,■ धनिको को "भामाशाह " सम्मान देकर
■ बुद्धिजीवि शिक्षक, वकील ,आदि " चाणक्य सम्मान " देकर
10 मिनट मे 25 आदमी को करना है
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■ कथा वाचक आयोजन समिति आयोजक सँत की प्रशंसा कथा मे एक बार दो मिनट का जरूर करे , और यज्ञ समिति को सहयोग दान करने की घोषणा एक मिनट का जरूर करै , यज्ञ मे दान करे , सहयोग दे अन्न, चावल फल, भोजन, पुजा सामग्री, वस्त्र आदि यज्ञ समिति को जनता दे ऐसा आकर्षक घोषणाएं करे ,
■ कथा वाचक अपनी ओर से सोशल वर्क जरूर कराए स्वास्थ्य जांच दवा, वस्त्र आदि वितरण , बच्चों की प्रतियोगिता , आयुर्वेद के मधु और स्वर्ण भष्म डा की सलाह से दो बुन्द ० से १८ साल के बच्चों को दे ,
■ कथा वाचक कथा के बाद अपनी माला मँच से नीचे किसी आम जनता को जरूर रोज पहनाऐ ,
■ कथा वाचक को जहाँ कुछ दिक्कत लगे चैप्टर बदलना हो , कुछ भूल रहा हो , वहां भजन , ताली , राम धुन श्रोता से करा दे , दो मिनट का होगा सब सामान्य हो जाएगा कोई जोक्स रख दे ,
■ हर समय छोटा बडा सबके लिए कथा वाचक और मण्डली आदर सूचक शब्द का प्रयोग मुस्कुराते हुए कहे , आरोप -प्रत्यारोप-तर्क न करे ,
■ किसी राजनैतिक दल , नेता , कम्पनी सरकार धर्म की आलोचना न करे न ही इनका नाम ले , जैसे कान्गेस का उपनाम रखे देश की पुरानी पाटी/ बुढी पाटी /बीजेपी - जय श्री राम वाले , /मुसलमान या इस्लाम की जगह - अरब वाले ख्वाज़ा , रेगिस्तान का धर्म / ईसाई- रोम वाले फादर के
ऐसा उपनाम दे जो सरलता से आम जनता समझ जाऐ , समय समय पर मीडिया भी उप नाम देती है तो उस उपनाम का ही प्रयोग करे ,
हर बात तर्क सँगत और कुशलता से रखा जाऐ , स्पष्ट और साफ साफ ,
■ कथाकार हर देश ,काल परिस्थिति , वर्तमान समस्या का समालोचना जरूर एक बार कथा मे रखे ,
■ कथा वाचक समसामयिक के लिए रोज अखबार का एडिटोरियल, व्यंग्य दो चार जरूर पढे ,
■ कथा मे कोई बात नकारात्मक/ निगेटिव न कहें ,
■ कथा मे धर्म विज्ञान,समसामयिक कथा का मूल कुछ श्लोक चौपाई छन्द कविता जोक्स भजन फिल्म धुन जरूर दे लिखित संकलन भी लिख कर रखे , रोज नोट तैयार कर पेज मेल आदि मे रखे और दो जगह रखे ,
■ विवेकानंद ओशो अरविंद शँकराचार्य देवदत पटनायक चाणक्य मनुस्मृति महाभारत,मानस ,वाल्मीकि रामायण भागवत , गीता के सभी एडिशन ,तिलक,गांधी, विनोवा भावे , आदि को करमवार पढे और जहाँ जरूरत हो नोट कर पेन्सिल से मार्क कर रखे , रोज दो घन्टा स्वअध्याय करे तर्क करे ,
■ कथा वाचक योग प्राणायाम, गायत्री जप दान जरूर करें ,
■ कथा मे वास्तु टिप्स , टोटके , मँत्र जप , को भी रखे ,
■■ धन हेतु
■ कथा वाचक खुद धन / पैसा की बात न करे एक मैनेजर रखें जो सँगीतज्ञ भी हो विश्वासी हो , धन / दक्षिणा की बात मैनेजर करे और जो हो वह लिखित हो , दोनो तरफ से , भाडा और कथा के दक्षिणा का ३० से ५० % एडवांस ले लिया जाऐ , किसी भी स्थिति में तब बुकिंग करे और समय दे , कथा स्थल से घर तक लाने ले जाने का भाडा , वाहन , या प्लेन का भाडा आयोजक को देना है
कथा स्थल पर भोजन ठहरने की व्यवस्था , केवल कथा मण्डली के भोजन फलाहार की व्यवस्था आयोजक को करना है , लाना और पहुचाना आयोजक का काम है , कथा का समय , दिन तिथि स्थान कथा के नियम शर्त सब प्राप्ति रसीद पर लिखा होना चाहिए जिसमे दोनो पक्ष का हस्ताक्षर हो , आवागमन का रेल जहाज बस कार की व्यवस्था आयोजक को करना है , उसमे देर होगी तो आयोजक की जिम्मेदारी है , कथा क्षेत्र मे कोई नुकसान को आयोजक को भरना है ,
■ चढावा और आरती:-
मँच पर , व्यास पीठ पर ,सँगीत मण्डली के वाद्य यँत्र पर चढावा और आरती ( कथा के श्री गणेश से कथा के बाद तक की आरती का धन) तथा विदाई वस्त्र, आभूषण, सब कथा वाचक का होगा ,
यह सब शर्त नियमावली मे लिखा होगा ,
■● वाद्य मण्डली मैनेजर , को कथा के कोई चढावा का हक नही होगा उन्हे उचित पारिश्रमिक जरूर दिया जाऐगा , हाँ दक्षिणा के बाद चलते समय जो यजमान विदाई धन वस्त्र देगा उनका अधिकार होगा , इसके अलावे उनका पारिश्रमिक भी होगा , इनका वाद्य यंत्र खुद का होगा , इन्हें दो दो वाद्य यँत्र रखना होगा ,
■ 1-नाल,2-आर्गन, 3-बांसुरी , 4-पेड , 5-गिटार , 6'झाल, 7 -गायक और 8-कोरस देने वाले हो , 9- रसोईया, 10 खुद कथा वाचक ,11 सहयोगी - (12- 15 आदमी)- फोटो ,विडियो करने वाला ,■
2-गाडी बडी - (ए सी) - ड्राइवर-1
2-सामान के लिए गाडी - मालवाहक गाडी,
इसी मे मैनेजर , लाइट , साउन्ड और स्टेज की जानकारी रखने वाला , धुन का चयन करने वाला , खुफिया विभाग ,
हर म्यूजियन का एक आप्सन रखना होगा , किसी भी समय
●ड्राइवर, सहयोगी और कोरस वाले काम होगा - चढावा , आरती आदि का हिसाब रखना , स्टेज का देख रेख , सुरक्षा पहलु चेक करते रहना , खुद का मँच का यज्ञ का , व्यवस्था का , कथा वाचक का , यज्ञस्थल के गाँव शहर का भी ,
●■ टीवी चैनल मे लाइव या रिकाँड चलाने का खर्चा , विडियो ग्राफी का खर्चा
का भी आयोजक से बात करना है ,
इसका पैसा आयोजक को अलग से देना होगा , अगर वे टी वी मे चलाना चाहते है तो , टीवी वालो से आयोजक को बात करा देना है , लेन देन का जिम्मेदार कोन होगा वह भी लिखित करना है इसका भी एडवांस चेक ले लेना है रोज के प्रसारण के हिसाब से ,
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