सामान्य उपासना विधि
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❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗
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👉🏻 प्रिय पाठकों-------
पूजन व पाठ की प्रारंभिक प्रक्रिया
* आसन पर बैठने से पहले - पूर्व निर्देश अनुसार धूणी व दिव्य जल से शुद्धिकरण पवित्रीकरण की प्रकिर्या पूरी करे फिर आसन पर बैठे ।
* पवित्रीकरण - इस मन्त्र को बोलकर जल छिड़के-
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वा वस्थाम् गतोअपि वा ।
य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षम् स बाह्याभ्यंतर: शुचि : ।।
* आचमन - अब सीधे हाथ की हथेली में जल लेकर निम्न मंत्र बोलकर 3 बार आचमन कीजिये ।
ॐ केशवाय नमः , ॐ नारायणाय नमः , ॐ माधवाय नमः ॐ ऋषिकेशाये नमः - बोलकर हाथ धो ले।
4 - आसन व पृथ्वी पूजन - अब थोड़ा सा जल आसन के सामने पृथ्वी पर छोड़े और ॐ ह्रीम् आधार शक्ति कमलासनाय नमः , गन्ध अक्षतम् सम्पूज्येत । बोलकर आसन व पृथ्वी का पूजन कीजिये।
5 दीप देवता पूजन - ॐ ह्रीम् दीपस्थ देवता भ्यो नमः , गन्ध अक्षतम् सम्पूज्येत । बोलकर दीपक का पूजन कीजिये ।
6 वरुणदेव पूजन - ॐ ह्रीं अपां पतये वरुण देवताभ्यो नमः , गन्ध अक्षतम् सम्पूज्येत । बोलकर जल पात्र / कलश या लौटे आदि में गंगा आदि नदियों तीर्थो का ध्यान करके वरुण देव का पूजन कीजिये।
* अब पृथ्वी माता को , आसन को , कर्म पात्र को प्रमाण करे एवं दीपक प्रज्जलित करके दीपक देवता को भी प्रणाम करे , ॐ भूर्भुवः स्व: मन्त्र से इनका पूजन करें । अब गायत्री मंत्र का 3 या 21 बार मानसिक जप कीजिये ।
* प्राणायाम :- सर्व प्रथम दाहिने नासिका को दाहिने अंगूठे से बन्द रखते हुए तथा बाई नासिका से श्वास अंदर लेते हुए गुरु मंत्र एक बार मन ही मन बोले फिर स्वास अंदर ही रोक कर चार बार गुरु मंत्र का जप करें तथा अब दाई नासिका को अंगुलियों से बन्द कर लेवे तथा दो बार गुरु मंत्र मन ही मन बोलते हुए दाई नासिका से स्वास बाहर छोड़े। इसके पश्चात पुनः आचमन कर मार्जन हेतु जल छिड़के।
* शिखा बंधन - ( चोटी ) बांध लें - गायत्री मंत्र या अथ नमः का उच्चारण कर चोटी को स्पर्श करें और मष्तिक पर तिलक लगाएं।
* संकल्प - दाहिने हाथ मे जल अक्षत दक्षिणा पुष्प आदि लेकर संकल्प करे ।
ॐ विष्णु विष्णु विष्णु : ... ममात्मनः श्रुति स्मृति पुराण उक्त फल प्राप्ति अर्थम सर्व दुःख दारिद्रय , सर्व अरिष्ट - सर्व रोग - सर्व कष्ट - सर्व बाधा शीघ्र निवारण हेतु , सर्व मनोकामना सिद्धयर्थे , माता भगवती अम्बे चरणारविन्द भक्ति प्राप्ति अर्थं पंच देवस्य बीज मंत्र पाठ अहं करिष्ये।
सब सामग्री गणेश जी के सामने छोड़ दे।
* अब सर्व प्रथम कुण्डलिनी प्रबोधन गणपति मन्त्र तथा मन्त्रो को जागृत करने हेतु मूल कुंजी मन्त्र का जो विशेष विधान गुरुदेव से प्राप्त हुआ है, उसका एक बार जप करें ।
* अब गुरुदेव व भगवान गणपति सहित सभी देवी देवताओं का स्मरण कर मानसिक पूजन व पाठ करें ।
विनायक गुरु भानु ब्रह्मा विष्णु महेश्वरं ।
सरस्वतीं प्रणम्यादौ सर्व कार्यार्थ सिद्धये ।।
ध्यान मूलं गुरुर्मूर्ति पूजा मूलं गुरु पदम् ।
मन्त्र मूलं गुरु वाक्यम् मोक्ष मूलं गुरु कृपा: ।।
ॐ श्री गुरुवे नमः , ॐ श्री परम् गुरुवे नमः ,
ॐ श्री परमेष्ठी गुरुवे नमः। ध्यायामि पूजयामि ।
श्री गणपति पूजन -
*ॐ कार रूपं वरदं भक्तानाम आर्तिनाशनम।
मंगलम मंगलानाम च वंदे तं गणनायकम।।
ध्यायामि पूजयामि ।
* ॐ गं गणपतये वर वरदये नमः - इस मन्त्र का 5 या 11 बार जप कीजिये।
*सानंद मानन्द वने वसन्तम् , आनंद कंदम् हृत पाप वृन्दम् ।
वाराणसी नाथ मनाथ नाथम् , श्री विश्वनाथम् शरणं प्रपद्ये ।। ध्यायामि पूजयामि ।
* ह्रीं ॐ नमः शिवाय ह्रीं - इस मन्त्र का 5 या 11 बार जप कीजिये।
*जयंति मंगला काली भद्रकाली कपालनी ।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते ।।ध्यायामि पूजयामि ।
* ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ह्रीं दुं दुर्गायै नमः । इस मन्त्र का 5 या 11 बार जप कीजिये
*नीलाचल निवाशाय नित्याय परमात्मने ।
शुभद्रा प्राण नाथाय जगन्नाथाय मंगलम् ।।ध्यायामि पूजयामि ।
* शुक्लाम्बर धरं विष्णु शशि वर्ण चतर्भुजं ।
प्रसन्न वदनं ध्यायेत सर्व विघ्नोप शान्तये ।।
* ॐ ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः - इस मन्त्र का 5 या 11 बार जप कीजिये।
*आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं, प्रभाकर नमोस्तुते।।
ध्यायामि पूजयामि ।
* ॐ घृणि: सूर्य आदित्य श्रीं - इस मन्त्र का 5 या 11 बार जप कीजिये।
* सूर्य अर्घ्य - तांबे के पात्र में ताजा जल भरकर उसमे रोली , लाल चंदन , गुड़ , अक्षत , लाल पुष्प डाल कर , हाथों को ह्रदय के पास लाकर - सूर्य भगवान को निम्नलिखित मंत्र बोल करके अर्घ्य प्रदान करें ।। सूर्य अर्ध्य केवल सुबह की पूजा के समय करे -
ॐ ऐही सूर्य देव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।
ॐ घृणि: सूर्याय नमः अर्घ्य समर्पयामि ।।
ॐ कर्म साक्षिणे अरुणाय नमः अर्घ्य समर्पयामि ।।
निम्नलिखित नाम मन्त्रो का उच्चारण कर भगवान सूर्य नारायण को साष्टांग प्रणाम करें -
( १ ) ॐ मित्राय नमः ( २ ) ॐ रवये नमः ३) ॐ सूर्याय नमः ४ ) ॐ भानवे नमः ५ ) ॐ खगाय नमः ६) ॐ पूष्णे नमः ७) ॐ हिरण्य गर्भाय नमः ८ ) ॐ मरीचये नमः ९ ) ॐ आदित्याय नमः १०) ॐ सवित्रे नमः ११ ) ॐ अर्काय नमः १२) ॐ भास्कराय नमो नमः ।
इसके बाद सूर्य अर्घ्य का जल मस्तक और आंखों पर लगाये तथा कुछ जल चरणामृत रूप में पी ले।
।
*गुरुमंत्र जप - अब गुरुमंत्र का विधान सहित कम से कम एक माला ( 108 ) जप कीजिये। यदि गुरु कृपा आपको प्राप्त नही हुई है तो दो मिनिट भगवान शिव का ध्यान करें।
* अपनी मनोकामना अनुसार दिव्य मन्त्रो का जप करें।
* अब हनुमान चालीसा आदि जो भी आप पाठ करना चाहे वो कर सकते है।
* इसके बाद आरती करके क्षमा प्रार्थना कर भगवान से मनोकामना सिद्धि हेतु तथा सभी समस्याओं के निवारण हेतु प्राथना करें।
* पाठ पूरा होने पर आसन से उठने से पूर्व ॐ ह्रींम् सर्व दिग्बन्धन विमोचय हुं फट् । बोलकर सर के ऊपर से घड़ी के विपरीत दिशा में दाये हाथ से चुटकी बजाए और आसन पर थोड़ा सा जल गिराकर ॐ विष्णवे नमः ॐ शक्राय नमः ॐ इन्द्राय नमः बोलकर 3 बार आसन को नमस्कार कर आसन से उठे ।
और बोले, अद्य दिनस्य कृतस्य पूजनादि जपादि सकल कर्म ब्रह्मर्पनमस्तु।।
हर हर महादेव
नोट --आप जो भी अन्य क्रिया करते है पूजन में वह सब भी करते रहें ।
यह जानकारी आप को मेरे ब्लॉग पर भी उपलब्ध हो जाएगा
और विस्तृत पूजा विधि भी मिल जायेगा ।
सम्पूर्ण---🖌
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