चिर हरण लीला
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❗❗ *आचार्य रुद्रेश्वरन* ❗❗
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👉🏻 प्रिय पाठकों-------
चिर हरण लीला का रहस्य
भगवान् श्रीकृष्ण पर आरोप लगाने वाले बुद्धि के शत्रु जरा बुद्धिके कपाट खोलो और विचार करो उस समय श्रीकृष्ण मात्र 6 वर्ष 3 मास के थे । 6 वर्षका बालक के अंदर कैसे स्त्रियों को निर्वस्त्र देखने भावना हो सकती है ? अब स्पष्ट करता हूँ — चीर हरण लीला उस समय हुई थी जब भगवान् श्रीकृष्ण 6 वर्ष 3 मास के थे और हेमन्त ऋतु के प्रथम मास मार्गशीर्ष (दिसम्बर) में गोप कन्याएँ जमुना स्नान करके माँ कात्यायनी का पूजन करती थीं —
“हेमन्ते प्रथमे मासे नन्दव्रजकुमारिका: ।
चेरुर्हविष्यं भुञ्जानाः कात्यायन्यर्चनव्रतम् ।।”
ये स्त्रियां नहीं व्रजकुमारिकाएं अर्थात् 5 से 8 वर्ष की कन्याएँ थीं । यही नहीं सुबह पौ फटते(ब्रह्म मुहूर्त में 4 बजे) ही जमुना स्नान करती थीं –
“उषस्युथाय गोत्रै: ….. कालिन्द्यां स्नातुमन्वहम् ।।” अब कल्पना कीजिए प्रातः पौ फटते ही सुबह ब्रह्ममूर्त में कितना अन्धकार रहता है , जिसमें गोपियाँ स्नान करती थीं , जिसमें कोई निर्वस्त्र तो क्या सवस्त्र भी नहीं दिखता । यही नहीं वो मार्गशीर्ष मास अर्थात् दिसम्बर की सर्दियोंमें जब सूर्योदयके बादभी घना कोहरा होता है , ऐसे में ब्रह्ममुहूर्त में भला कोई मनुष्य को निर्वस्त्र कैसे देख सकता है ? जब सवस्त्र नहीं दिखाई देता है । और आश्चर्यतो ये है आरोप लगाने वाले ने ये भी विचार नहीं किया ,कि उस समय बिजली भी नहीं थी , यही नहीं भगवान् श्रीकृष्ण तो स्वयं ही वृक्ष पर छिपकर बैठ गए थे न कि गोपियों को निर्वत्र निहार रहे हों । यह आरोप पाप दृष्टिसे ही किसी दुर्मति ने लगाया होगा अन्यथा थोड़ी भी बुद्धि होने वाला मनुष्य ऐसे आरोप नहीं लगाएगा ।
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