आठ प्रकार के होते है भैरव देव

*💥आठ प्रकार के होते है भैरव देव💥*

भैरव देवता भगवान शिव के रूद्र रूप है तथा उनके गणो में से एक है, वही वे माता भवानी के अनुचारी भी है। भैरव देवता को रात्रि का देवता भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म ग्रंथो में भगवान शिव के दो रूपों का वर्णन मिलता है जिसमे  भगवान शिव का एक स्वरूप जगत के रक्षक व् भक्तो को अभ्य देने वाले विश्वेशर के रूप में जाना जाता है तो दूसरा स्वरूप ठीक उसके विपरीत है।

अपने दूसरे स्वरूप कालभैरव के रूप में भगवान शिव दुष्टो का संहार करते है उनका यह रूप अति विकराल और भयंकर है। भगवान भैरव के मुख्यतः आठ स्वरूप है, उनके इन आठो स्वरूपों को पूजने से वे अपने भक्तो पर प्रसन्न होते है तथा उन्हें अलग-अलग फल प्रदान करते है।
  
श्री भैरव के अनेक रूप हैं जिसमें प्रमुख रूप से बटुक भैरव, महाकाल भैरव तथा स्वर्णाकर्षण भैरव प्रमुख हैं। जिस भैरव की पूजा करें उसी रूप के नाम का उच्चारण होना चाहिए। सभी भैरवों में बटुक भैरव उपासना का अधिक प्रचलन है।

रविवार, बुधवार या भैरव अष्टमी पर इन 8 नामों का उच्चारण करने से मनचाहा वरदान मिलता है। भैरव देवता शीघ्र प्रसन्न होते हैं और हर तरह की सिद्धि प्रदान करते हैं। क्षेत्रपाल व दण्डपाणि के नाम से भी इन्हें जाना जाता है।

आइये जानते है भगवान भैरव के इन आठ रूपों को.

#क्रोध_भैरव:- भगवान भैरव के इस रूप का रंग नीला होता है तथा इनकी सवारी गरुड़ होती है। भगवान शिव के भाति ही क्रोध भैरव की भी तीन आंखे होती है तथा ये दक्षिण और पश्चिम के स्वामी माने जाते है। काल भैरव के इस रूप की पूजा करने पर सभी प्रकार की मुसीबतो और परेशानियों से मुक्ति मिलती है तथा व्यक्ति में इन मुसीबतो एवं परेशनियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

#कपाल_भैरव:- भैरव जी का यह रूप चमकीला होता है तथा इस रूप में वह हाथी पर सवारी करते है। इस रूप में काल भैरव के चार हाथ होते है, अपने दाए दो हाथो में वे त्रिशूल और तलवार पकड़े है तथा उनके बाये दो हाथो में एक अश्त्र और एक पात्र है। भगवान भैरव के इस रूप की पूजा करने पर व्यक्ति सभी क़ानूनी कार्रवाइयों से मुक्ति प्राप्त करता है तथा उसके सारे अटके काम बनने लगते है।

#असितांग_भैरव:- असितांग भैरव की भी तीन आँखे होती है तथा इनका पूरा शरीर काले रंग का है। असितांग भैरव की सवारी हंस है तथा ये अपने गले में कपाल की माला धारण किये हुए है। इनका अश्त्र भी कपाल है। भगवान भैरव की इस रूप की पूजा करने पर व्यक्ति की कलात्मक क्षमता बढ़ती है।

#चंदा_भैरव:- भगवान भैरव का चंदा रूप सफेद रंग का है, तथा वे तीन आँखों से सुशोभित है। इस रूप में वह मोर की सवारी करते है। अपने चंदा रूप में भगवान भैरव  एक हाथ में तलवार, दूसरे हाथ में पात्र, तीसरे हाथ में तीर व चौथे हाथ में धनुष धारण किये हुए है।  भगवान भैरव के इस रुप को पूजने वाला व्यक्ति अपने शत्रुओ पर विजयी प्राप्त करता है तथा हर कार्य में उसे सफलता प्राप्त होती है।

#गुरु_भैरव:- भैरव का गुरु रूप अत्यंत प्रभावी व आकर्षक है इस रूप में वे बेल पर सवारी करते है। इस रूप में वे अपने हाथो पर कुल्हाड़ी, पात्र, तलवार और कपाल धारण किये हुए है तथा उनके कमर में एक सर्प लिपटा हुआ है। गुरु भैरव की पूजा करने पर समस्त ज्ञान की प्राप्ति होती है।

#संहार_भैरव:- संहार भैरव का रूप बहुत ही अद्भुत है इस रूप  में उनका पूरा शरीर लाल रंग का है। संहार भैरव इस रूप में नग्न है तथा उनके मष्तक में कपाल स्थापित है वह भी लाल रंग का। उनका वाहन कुत्ता है तथा उनकी तीन आँखे है व उनके शरीर में साप लिपटा हुआ है। संहार भैरव के इस रूप की पूजा करने पर व्यक्ति अपने समस्त पापो से मुक्ति प्राप्त करता है।

#उन्मत्त_भैरव:- उन्मत्त भैरव का शरीर पीले रंग का है तथा वे घोड़े पर सवारी करते है। भैरव का यह रूप शांत स्वभाव का कहलाता है तथा इनकी पूजा अर्चना करने से व्यक्ति अपने सभी नकरात्मक विचारो से मुक्ति पाता है व उसे शांत एवं सुखद भावना की अनुभूति होती है।

#भीषण_भैरव:- भीषण भैरव की सवारी शेर है तथा उन्होंने अपने एक हाथ में कमल का फूल , दूसरे में तलवार, तीसरे में त्रिशूल व चौथे में एक पात्र पकड़ा हुआ है। भगवान भैरव की भीषण रूप में पूजा करने पर बुरी आत्माओ और भूत प्रेतों से छुटकारा मिलता है।

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