श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
*💥श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग💥*
सप्तमोक्षदायिनी पुरियों में अवंतिका (उज्जैन) भी एक पुरी है । यह उत्तर भारत का एक प्रमुख शैव क्षेत्र है । उज्जैन के महाकाल वन में शिप्रा नदी के तट पर भगवान महादेव का ‘महाकालेश्वर’ ज्योतिर्लिंग प्रतिष्ठित है । अवंती या अवंतिका भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है । यह परम पुण्यमय और लोकपावनी पुरी है । महाकालेश्वर - लिंग की स्थापना के संबंध में पुराणों में अनेक आख्यान प्राप्त होते हैं । एक कथा के अनुसार उज्जयिनी के राजा चंद्रसेन की शिवार्चना को देखकर श्रीकर नामक एक पांच वर्ष का गोपबालक बड़ा ही उत्कण्ठित हुआ । वह एक सामान्य पत्थर को घर में स्थापित कर उसकी शिवरूप में उपासना करने लगा, परिवारजनों ने बालक की इस क्रिया को साधारण खेल समझकर तथा इस आदत को मिटाने के लिये अनेक प्रकार के कठिन प्रयत्न किये, किंतु शिवभक्त श्रीकरकी शिवभक्ति अनुदित बढ़ती ही गयी । अंत में अपने भक्त को दर्शन देने के लिये भगवान ज्योतिर्लिंग रूप में महाकाल वन में प्रकट हुए और वहीं स्थित हो गये ।
एक दूसरा इतिहास यह भी है कि किसी समय इस अवंतिका पुरी में एक अग्निहोत्री वेदपाठी ब्राह्मण रहता था, जो अपने देवप्रिय, प्रियमेधा, सुकृत और सुव्रत नामक चार पुत्रों के साथ शिवनिष्ठा तथा धर्मनिष्ठा की पताका फहरा रहा था । उसकी कीर्ति सुनकर ब्रह्मा जी से वर - प्राप्त एक महामदांध दूषण नामक असुर, जो रत्नमाल पर्वत पर रहता था, अपने दल बलसहित चढ़ आया । लोगों में त्राहि - त्राहि मच गयी । अंतत: उस ब्राह्मण तथा ब्राह्मणपुत्रों की शिवभक्ति के प्रताप से भगवान भूतभावन एक गर्त से प्रकट हो गये और उन्होंने एक हूंकार मात्र से उस असुर को सेनासहित विनष्ट कर डाला और फिर वे संसार के कल्याण के लिये सदा वहीं वास करने का उस ब्राह्मण को वर देकर अंतर्धान हो गये । तब से भगवान शंकर लिंगरूप से वहां स्थित हो गये । चूंकि भगवान भयंकर हुंकार सहित वहीं प्रकट हुए थे, इसलिए वे ‘महाकाल’ नाम से प्रसिद्ध हुए ।
भगवान महाकालेश्वर मंदिर का प्रांगण विशाल है । मंदिर अत्यंत भव्य एवं रमणीय है । भगवान का ज्योतीरूप भूमि की सतह से नीचे एक गर्भगृह में स्थापित है । लिंगमूर्ति विशाल है और चांदी की जल हरी में नाग परिवेष्टित है । इसके एक ओर गणेश, दूसरी ओर पार्वती तथा तीसरी ओर स्वामी कार्तिकेय की मूर्ति विराजमान है । द्वार के सामने विशाल नंदी की प्रतिमा है । शिवरात्रि पर यहां बहुत भीड़ होती है । उज्जैन का शिप्रा के तट पर लगने वाला कुंभ का मेला तो प्रसिद्ध ही है । श्रद्धालु भक्तगण भगवती शिप्रा में स्नान तथा महाकालेश्वर का दर्शन कर अपने को धन्य मानते हैं ।
टिप्पणियाँ