शिव-वन्दना

“शिव-वन्दना”

शिवकी चरणधूल मिल जाए ।
रहे न विपदा संकट कोई, त्रिविध ताप मिट जाए ।।

आदि-अन्त से परे सदाशिव, परमेश्वर कहलाए ।
समरसता की जगे ज्योति जब, शिव-दर्शन हो जाए ।।

करुणानिधि हैं गौरीशंकर, ‘श्याम’ शरण में आए ।
शिव-शिव नाम जपे जो प्राणी, भव-सागर तर जाए ।।
(‘कल्याण’ पत्रिका; वर्ष – ८२, संख्या – ४ : गीताप्रेस, गोरखपुर)

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